टेलीफोन के 24 खंभे चुराने के आरोप में 13 साल से जेल में बंद सिराज को अदालत ने दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे 10 साल की सजा सुनाई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश निरंजन कुमार ने जेल में बिताई करीब 13 साल की अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया है।
विभूति खंड पुलिस ने तीन जुलाई 2013 को अयोध्या रोड से चार लोगों को टेलीफोन के 24 खंभे ले जाते पकड़ा था। करीब सात-सात फीट लंबे इन पोल की कीमत लगभग 50 हजार रुपये बताई गई थी।
पुलिस ने सिराज, मोनू सिंह भदौरिया, शाहिद सिद्दीकी और मो. अजहर अली के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था। बाद में मोनू, शाहिद और मो. अजहर जमानत पर बाहर आ गए, लेकिन गरीबी की वजह से सिराज जेल में ही बंद रहा।
अदालत से लगाई थी गुहार
11 अप्रैल 2016 को सिराज की पत्रावली को मूल मुकदमे से अलग कर दिया गया। सुनवाई के दौरान सिराज ने पुलिस के आरोपों से इन्कार कर दोबारा परीक्षण की मांग की थी। मामला अदालत में चलता रहा और समय बीतता गया। 22 सितंबर 2026 को सिराज ने सभी आरोपों को स्वीकार कर अपराध कबूल कर लिया।
उसने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि वह करीब 13 साल जेल में रह चुका है, गरीब है और भविष्य में ऐसा अपराध नहीं करेगा। उसकी यह पहली गलती थी। उसने कम से कम सजा देने की गुहार लगाई। अदालत ने सिराज को चोरी की संपत्ति रखने, चोरी की संपत्ति के कारोबार से संबंधित आईपीसी की धाराओं में दोषी करार देते हुए 10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई।