लखनऊ। 'साहब, मेरी मां का निधन हो चुका है और मेरा विवाह विच्छेद भी हो गया है। फैमिली पेंशन के लिए आवेदन किया तो बाबू कहते हैं कि सिस्टम वर्टिकल हो गया है, इसलिए अभी पेंशन नहीं बनेगी।' यह पीड़ा राजाजीपुरम निवासी पूनम कश्यप की है। वह शनिवार को गोखले मार्ग स्थित मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय में आयोजित पेंशन अदालत में अपनी व्यथा सुना रही थीं।
पूनम ने कार्यकारी निदेशक (कार्मिक) विनोद कुमार मिश्रा को बताया कि उनकी मां (पेंशनर) उर्मिला कश्यप का 2023 में निधन हो गया था। राजाजीपुरम खंड के बाबू उमेश वर्मा दो महीने से उन्हें दौड़ा रहे हैं। हुसैनाबाद स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय में भी सुनवाई नहीं हुई। निदेशक ने मामले का संज्ञान लेते हुए 15 दिनों के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पति की मौत को साल बीता, पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिली
पेंशन अदालत में हरदोई से आई महिलाओं ने भी विभागीय लापरवाही की पोल खोली। सुनीता वर्मा (सुजौरा पचकोहरा) ने बताया कि 20 जनवरी 2024 को उनके पति की मृत्यु हो गई थी, लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी विभाग ने अब तक एक भी देयक का भुगतान नहीं किया है। वहीं, हरदोई के गिलजई शाहाबाद निवासी आरफा नाज ने प्रार्थना पत्र किया कि उनके पति का निधन 27 जून 2014 को हुआ था। वर्षों की दौड़-भाग के बावजूद उन्हें भुगतान के नाम पर एक धेला तक नहीं मिला। इन मामलों पर कार्यकारी निदेशक ने हरदोई के अधीक्षण अभियंता को तत्काल भुगतान करने और रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के आदेश दिए।
निदेशक को समस्या बतातीं पूनम।