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Lucknow News: सिल्वर टच के खिलाफ वसूली की शिकायतें बढ़ीं, रायबरेली-सीतापुर में भी सामने आए पीड़ित, दी तहरीर

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परिवहन विभाग का मामला
बरेली में पूर्व एटीसी व सिल्वर टच प्रतिनिधियों के खिलाफ हो चुकी है एफआईआर

लखनऊ। बरेली में एफआईआर दर्ज होने के बाद डीएल बनाने वाली एजेंसी सिल्वर टच के खिलाफ पीड़ित सामने आने लगे हैं। रायबरेली व सीतापुर में पीड़ितों ने कंपनी प्रतिनिधियों पर नाैकरी के लिए सिक्योरिटी मनी के नाम पर तीन-तीन लाख रुपये वसूलने की शिकायत की है। पुलिस ने तहरीर लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। लेकिन पीड़ित कर्मी जनता दरबार में मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाएंगे।
परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट करने व आवेदकों को डिलीवर करने की जिम्मेदारी तीन कंपनियों सिल्वर टच, फोकाम व रोजमार्टा को साैंपी गई है। तीनों कंपनियों ने करीब 320 डीएल कर्मचारियों की नियुक्ति की। उनसे नाैकरी के नाम पर तीन से पांच लाख रुपये तक वसूले। हाल ही में बरेली में पीड़ित कर्मचारी अमन ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें पूर्व अपर परिवहन आयुक्त, आईटी सुनीता वर्मा, सिल्वर टच प्रतिनिधि श्याम मोहन अग्निहोत्री सहित कई लोगों पर पांच लाख रुपये वसूलने का आरोप लगाया। पुलिस मामले की जांच कर ही है। बरेली में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रदेश के अन्य जिलों से भी पीड़ित सामने आने लगे हैं। बीते 22 अगस्त को रायबरेली व सीतापुर में तीन पीड़ित कर्मचारियों ने पुलिस में तहरीर दी है।
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सिक्योरिटी मनी बताकर वसूले, लाैटाए भी नहीं
रायबरेली में तैनात रहे डीएल कर्मी अखिलेश कुमार ने हरचंदपुर थाने में तहरीर दी है। उन्होंने बताया कि बीते दिसंबर में नियुक्ति के नाम पर सिल्वर टच कर्मी पीपी सिंह ने पांच लाख रुपये सिक्योरिटी के नाम पर मांगी गई। असमर्थता जताने पर इसे तीन लाख रुपये कर दिया गया। नियुक्ति के बाद जब तनख्वाह का पैसा वापस देने से मना कर दिया तो नाैकरी से निकाल दिया। लेकिन सिक्योरिटी के नाम पर वसूले गए तीन लाख रुपये नहीं दिए गए। रायबरेली के ही अनुज कुमार ने भी हरचंदपुर थाने में वसूली की शिकायत दर्ज कराई है। ऐसे ही एआरटीओ सीतापुर में तैनात रहे डीएल कर्मी धर्मवीर ने खैराबाद, सीतापुर थाने में सिल्वर टच कंपनी के खिलाफ तहरीर दी। उन्होंने बताया कि कंपनी के प्रतिनिधि पीपी सिंह ने उनसे तीन लाख रुपये नाैकरी के नाम पर वसूले। दो महीने बाद उन्हें सैलरी नहीं लाैटाने पर नाैकरी से निकाल दिया गया। सिल्वर टच के प्रतिनिधि पीपी सिंह ने उन पर लगाए गए सारे आरोपों को एकसिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि पीड़ितों से कोई वसूली नहीं की गई है। वह पुलिस जांच के लिए तैयार हैं।

इसलिए नाैकरी से निकाले गए कर्मी
प्रदेशभर में करीब 45 कर्मचारियों को अभी तक नाैकरी से बाहर निकाला जा चुका है। डीएल बनाने वाली कंपनियों ने पहले नियुक्ति के लिए वसूली की। फिर जब कर्मचारियों से उनकी तनख्वाह का पैसा एडवांस मांगा तो विवाद शुरू हो गया। जिन कर्मचारियों ने ऐसा करने से मना कर दिया, उन्हें नाैकरी से हटा दिया। ऐसे कई पीड़ित मुख्यमंत्री जनता दरबार भी गए, जिसमें से कुछ को वापस नाैकरी पर भी लेना पड़ा।

निष्पक्षता से होती जांच तो खुलता भ्रष्टाचार
डीएल एजेंसी सिल्वर टच, फोकाम व रोजमार्टा के खिलाफ शिकायतों का अंबार है। इसमें मुख्तार गैंग के गुर्गाें द्वारा नियुक्ति करवाने से लेकर कर्मचारियों से वसूली के मामले शामिल हैं। पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने 25 जिलों के डीएम को जांच के लिए पत्र भी लिखे, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकी। ऐसे में पीड़ितों की मांग है कि निष्पक्षता से जांच होती तो अफसरों के भ्रष्टाचार की भी पोल खुलती।
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आधिकारिक वर्जन
डीएल एजेंसियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए इंतजाम किए गए हैं। बगैर मुख्यालय की सूचना व अनुमति के कर्मचारियों को नाैकरी से नहीं निकाला जा सकेगा। सात तारीख तक प्रत्येक कर्मचारी की तनख्वाह कंपनियों को देना होगा। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी।
-आशुतोष निरंजन, परिवहन आयुक्त


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