रेडिएशन का असर बाद में दिखता है लेकिन रोजमर्रा के जीवन में उपयोग में लाई जाने वाली चीजें हमारे लिए कब खतरा बन जाएं, ये हम नहीं जान पाते।
रेडियो एक्टिव विकिरण का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ सकता है। इससे उसकी कोशिकाओं में विकृति आ सकती है जिससे बच्चे का विकास प्रभावित हो जाता है। खासतौर से एक्स-रे, सीटी स्कैन के विकिरण से गर्भस्थ शिशु को बचाना बहुत जरूरी होता है।
क्योंकि इसका असर क्या पड़ा है ये बाद में दिखता है। केजीएमयू के रेडियोडायग्नोसिस विभाग की हेड प्रो. नीरा कोहली ने रेडिएशन के कारण होने वाले प्रभावों और चिकित्सा में इसके इस्तेमाल पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
प्रो. कोहली इंडियन सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक रेडियोलॉजी की उपाध्यक्ष भी हैं। प्रो. नीरा कोहली ने बताया कि राजधानी में शुक्रवार से पहली बार दो दिवसीय 13वीं नेशनल कांफ्रेंस ऑफ पीडियाट्रिक रेडियोलॉजी का आयोजन किया जा रहा है।
जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ जुटेंगे। उन्होंने बताया कि विकिरण का शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव का उदाहरण हिरोशिमा और नागासाकी है। रेडिएशन का प्रभाव ज्यादा होने पर त्वचा, आंखें, थायराइड ग्लैंड आदि प्रभावित हो सकते हैं। इसकी वजह से बांझपन और बच्चे पैदाइशी विकृति हो सकती है।