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जहरीली कफ सिरप कांड में खुलासा: पश्चिम बंगाल के तस्करों को 500 रुपये में कफ सिरप बेच शुभम ने कमाए 800 करोड़

Thu, 08 Jan 2026 11:14 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

जहरीली कफ सिरप कांड में आरोपियों ने तस्करी कर अरबों की दौलत बनाई है। आरोपी शुभम ने पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में तस्करों को कफ सिरप भेज 800 करोड़ बनाए।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नशीले कफ सिरप सिंडिकेट के मुख्य आरोपियों में शामिल शुभम जायसवाल ने पश्चिम बंगाल के तस्करों को 500 रुपये में सिरप की एक बोतल बेची थी। उसने अपनी फर्म शैली ट्रेडर्स के जरिये 2.24 करोड़ बोतलें बांग्लादेश तस्करी के लिए दी थीं। इससे शुभम ने करीब 800 करोड़ की कमाई अर्जित की। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में यह खुलासा होने के बाद उसकी काली कमाई के सुराग तलाशने की कवायद तेज हो गई है।

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अधिकारियों के मुताबिक शुभम ने फेंसेडिल कफ सिरप खरीदने के लिए एबॉट फॉर्मास्युटिकल्स कंपनी को 312 करोड़ का भुगतान किया था। यह रकम उसने थोक कारोबारियों से जुटाई थी। अधिकारियों को शक है कि करोड़ों की यह रकम शुभम को उसके किसी करीबी ने दी थी, जिनमें एक बाहुबली समेत कुछ राजनेता हो सकते हैं। जांच में पता चला कि शुभम को पश्चिम बंगाल के दो तस्करों से विभोर राणा और विशाल सिंह ने मिलवाया था। दोनों तस्करों का मेरठ के आसिफ से लिंक भी तलाशा जा रहा है।

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8 बैच नंबर के सिरप बरामद : एबॉट कंपनी द्वारा शैली ट्रेडर्स को बेचे गए आठ बैच के सिरप की खेप को पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बीते दिनों पकड़ा था। यह खेप रांची स्थित शैली ट्रेडर्स के गोदाम से सोनभद्र भेजने के दस्तावेज तैयार किए गए थे, जबकि पूरी खेप सीधे पश्चिम बंगाल भेज दी गई। अब बीएसएफ और एनसीबी से इस जानकारियां जुटाई जा रही है।

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हर दवा फर्म का नए सिरे से होगा सत्यापन

प्रदेश के हर लाइसेंसी थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों व गोदाम का फरवरी में नए सिरे से सत्यापन होगा। इस संबंध में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने सभी सहायक आयुक्तों एवं औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिया है। विभाग द्वारा सत्यापन शुरू होने से पहले कोई थोक औषधि विक्रेता फर्म लाइसेंस सरेंडर करना चाहता है तो आवेदन कर सकता है।

खाद्य अधिकारी ही कर सकते हैं जांच: खाद्य पदार्थ की जांच सिर्फ खाद्य अधिकारी ही कर सकते हैं। अन्य किसी भी कर्मचारी को जांच की अनुमति नहीं है।
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