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Lucknow News: चारबाग रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में पेयजल और शौचालयों की कमी, यात्री परेशान

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चारबाग रेलवे स्टेशन।
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लखनऊ। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वीआईपी स्टेशन चारबाग के के सर्कुलेटिंग एरिया में यात्री पेयजल के लिए तरस रहे हैं। यहां पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है, जिससे यात्रियों को बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है। शौचालयों की भी कमी है, जिससे महिलाएं विशेष रूप से परेशान हैं।
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यह स्टेशन प्रतिदिन 180 से अधिक ट्रेनों और 1.25 लाख यात्रियों की आवाजाही का केंद्र है। डीआरएम सुनील कुमार वर्मा ने हाल ही में स्टेशन का निरीक्षण किया था, पर उन्हें सर्कुलेटिंग एरिया में पेयजल और शौचालयों की कमी नजर नहीं आई। रेलवे भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) चारबाग स्टेशन को विश्वस्तरीय बना रहा है, जिस पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे। इसके तहत सेकंड एंट्री और प्लेटफॉर्मों पर निर्माण कार्य जारी हैं। आरक्षण केंद्र से लेकर कैबवे तक कहीं भी पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। स्टेशन पर जीआरपी कार्यालय के सामने एक निशुल्क शौचालय है। इसके अतिरिक्त नम्मो शौचालय और रेल कोच रेस्टोरेंट की तरफ ईको टॉयलेट है, मगर दोनों सशुल्क सेवाएं हैं, जिससे रात में यात्रियों को अधिक दिक्कत होती है।
डीआरएम सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि समय-समय पर स्टेशन का निरीक्षण किया जाता है। जो कमियां मिलती हैं, उसे दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं। यात्री सुविधाएं बढ़ाने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।
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महिला यात्रियों की दुश्वारियां
चारबाग का सर्कुलेटिंग एरिया करीब 500 मीटर में फैला हुआ है। यहां एक शौचालय है, जो केवल पुरुषों के लिए बना है। ऐसे में महिला यात्रियों के पास कोई विकल्प नहीं है। उन्हें स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक तक बने शौचालय में जाना पड़ता है। सर्कुलेटिंग एरिया में पहले से मौजूद नम्मो टॉयलेट भी सशुल्क है।
अन्य समस्याएं और यात्री संगठनों की चिंता
रेल कोच रेस्टोरेंट के सामने दो पहिया वाहनों की पार्किंग अपग्रेडेशन कार्यों के लिए खाली कराई गई थी। महीनों बाद भी वहां काम नहीं हुआ, जिससे गंदगी और जलभराव हो गया है। इसमें मच्छर पनप रहे हैं। इससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल का कहना है कि रेलवे प्रशासन का ध्यान यात्री सुविधाओं पर नहीं है। अधिकारी अपग्रेडेशन कार्य का बहाना देते हैं और सर्कुलेटिंग एरिया में गड्ढे भी हैं, जिससे यात्री चोटिल हो जाते हैं।
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