फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फलाहार खाने वाले हो जाएं सावधान, नई पैंकिग में बिक रही पुरानी सामग्री

Mon, 03 Oct 2016 01:37 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
विज्ञापन
डेमो - फोटो : demo pic
विज्ञापन
नवरात्र पर फलाहार सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतने की जरूरत हैं। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मुनाफाखोर पिछले सीजन की रखी फलाहार सामग्री को नई पैकिंग में बेच रहे हैं। त्यौहारों के सीजन में अभी तक एफएसडीए की तरफ से सैंपलिंग शुरू न होने से बेखौफ दुकानदार जमकर कमाई कर रहे हैं। 
विज्ञापन


नवरात्र पर मिलावटी व मिसब्रांडेड कुट्टू आटा व अन्य फलाहार की घटिया सामग्री श्रद्धालुओं की सेहत बिगाड़ सकती है। इस दौराब कुट्टू अथवा सिंघाड़ा आटे की खपत सामान्य से कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। 

इसका फायदा उठाकर मुनाफाखोर मानकों की अनदेखी कर पुराने स्टाक को ही नयी पैकिंग में खपा रहे हैं। यह सामग्री 80 से 120 रुपया प्रति किलो तक बेची जा रही है। जबकि यही गुणवत्ता युक्त सिंघाड़ा व कुट्टू आटा 140 से 160 रुपया प्रति किग्रा की दर से मिलता है। 
विज्ञापन

 
धंधेबाज कुट्टू आटे के साथ ही व्रत में प्रयोग करने वाले वनस्पति व देशी घी के नाम पर भी मानक के घटिया व मिलावटी माल तैयार कर इसे ब्रांडेड कंपनियों के नाम से बेचा जा रहा है। 
Trending Videos
विज्ञापन

पेट ही नहीं द‌िल की बीमारी भी बढ़ा देती है

डेमो - फोटो : demo pic
इस तरह की खाद्य सामग्री का सेवन न केवल पेट वरन दिल की बीमारी कई गुना तक बढ़ा देती है। देसी घी की खुशबू वाले परफ्यूम के सहारे धड़ल्ले से साधारण घी को ही दो से ढाई सौ रुपया प्रति किग्रा के दाम पर बेजा जा रहा है। 

चिकित्सकों के अनुसार पुरानी पैकिंग के फंफूद युक्त आटे के सेवन से ही उल्टी दस्त आने, सिर चकराने व जी घबराने की शिकायत होती है। ऐसे में खरीदते समय पैकिंग डेट के साथ पैकेट के सीलबंद स्वरूप को जरूर परखना चाहिए।

सामान्यत: खराब व अधोमानक सिंघाड़े व कुट्टू आटे को गूंथते समय उसमें अनावश्यक लस व तीखी गंध का एहसास होने लगता है। ऐसे आटे को उपयोग में न लाकर तत्काल नष्ट कर देना चाहिए।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें