नवरात्र पर फलाहार सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतने की जरूरत हैं। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मुनाफाखोर पिछले सीजन की रखी फलाहार सामग्री को नई पैकिंग में बेच रहे हैं। त्यौहारों के सीजन में अभी तक एफएसडीए की तरफ से सैंपलिंग शुरू न होने से बेखौफ दुकानदार जमकर कमाई कर रहे हैं।
नवरात्र पर मिलावटी व मिसब्रांडेड कुट्टू आटा व अन्य फलाहार की घटिया सामग्री श्रद्धालुओं की सेहत बिगाड़ सकती है। इस दौराब कुट्टू अथवा सिंघाड़ा आटे की खपत सामान्य से कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है।
इसका फायदा उठाकर मुनाफाखोर मानकों की अनदेखी कर पुराने स्टाक को ही नयी पैकिंग में खपा रहे हैं। यह सामग्री 80 से 120 रुपया प्रति किलो तक बेची जा रही है। जबकि यही गुणवत्ता युक्त सिंघाड़ा व कुट्टू आटा 140 से 160 रुपया प्रति किग्रा की दर से मिलता है।
धंधेबाज कुट्टू आटे के साथ ही व्रत में प्रयोग करने वाले वनस्पति व देशी घी के नाम पर भी मानक के घटिया व मिलावटी माल तैयार कर इसे ब्रांडेड कंपनियों के नाम से बेचा जा रहा है।