शिवपाल ने 12 अक्तूबर को मथुरा से सामाजिक परिवर्तन रथयात्रा शुरू की थी। वे सपा से गठबंधन के लिए हमेशा तैयार रहे, लेकिन सम्मान की दुहाई देकर कई बार तल्ख भी हुए। यात्रा की शुरुआत में उन्होंने धर्म-अधर्म का जिक्र करते हुए कहा था कि अब रण होगा।
दीपावली पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन की बात साफ की और बीते दिनों पत्रकारों से बातचीत में भी अखिलेश ने कहा कि परिवार के बडे़ बुजुर्ग भी चाहते हैं कि चाचा साथ रहें। सपा अध्यक्ष ने जब सम्मान लौटाने की बात कही तो प्रसपा अध्यक्ष गठबंधन से दो कदम आगे बढ़कर अब विलय की बात करने लगे हैं।
दल ही नहीं, दिलों को भी मिलाने की होगी कोशिश
इतना जरूर है कि वे सपा से अलग होते वक्त उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वालों को भी सम्मान दिलाना चाहते हैं। वे अपने वरिष्ठ साथियों को किसी भी कीमत पर बीच राह में नहीं छोड़ना चाहते हैं। वे कुछ लोगों को चुनाव मैदान में उतारने और कुछ को भविष्य में समायोजित करने की भी मांग कर रहे हैं।
ऐसे में दोनों दलों में दखल रखने वाले रणनीतिकार नए फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। ताकि दोनों दलों के मिलन के साथ नेताओं के दिल की दूरियां भी मिट जाएं और सियासी हिस्सेदारी भी मिल जाए। सपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व भी शिवपाल के खास लोगों के समायोजन के लिए तैयार है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक हर पहलू पर बात तय हो जाएगी।