मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रणनीति आखिर काम कर ही गई, सपा प्रदेशाध्यक्ष चाचा शिवपाल यादव को उनके रथयात्रा के मंच पर आना ही पड़ा। सपा सुप्रीमो मुलायमसिंह यादव के साथ वे न सिर्फ मंच पर आए, बल्कि भाषण दिया, अखिलेश को रथयात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। यह ही नहीं, उन्होंने बर्खास्त नेताओं के साथ मंच भी साझा किया।
दरअसल अखिलेश ने सारा जोर मुलायम सिंह को रथयात्रा की शुरुआत में लाने पर लगा दिया था। अखिलेश समर्थकों का मानना था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम मंच पर होंगे, तो प्रदेश अध्यक्ष को मजबूरी में आना ही पड़ेगा।
एक दिन पहले तक शिवपाल रथयात्रा में आने पर ना-नुकर कर रह थे, रजत जयंती समारोह की तैयारियों में व्यस्तता का हवाला दे रहे थे। लेकिन, मुलायम ने हां कर दी, तो उनके पास कोई चारा नहीं बचा था।
गठबंधन बनाने में जुटे मुलायम-शिवपाल के सामने दूसरी पार्टी के नेताओं ने अखिलेश की तरफदारी करके सपा सुप्रीमो को मुलायम करने में मदद की। नीतीश कुमार ने तो साफ कह दिया था कि मुलायम पहले अपने घर के झगड़े सुलटाएं।