...अब सम्मान बचाते हुए उतरे मैदान में
मैनपुरी से डिंपल यादव प्रत्याशी बनाई गईं। शिवपाल ने जसवंत नगर सहित विभिन्न इलाके में बैठक कर समर्थकों की नब्ज टटोली। सभी ने नेताजी के नाम पर एकजुटता का संदेश दिया। फिर भी शिवपाल को डिंपल के नामांकन में नहीं बुलाया गया। उन्होंने चुप्पी साध ली लेकिन चंद दिनों बाद सपा शीर्ष नेतृत्व को यह महसूस हुआ कि बिना शिवपाल के चुनावी वैतरणी पार नहीं की जा सकती है। आखिरकार अखिलेश और डिंपल ने पहल की। वे शिवपाल को मनाने पहुंचे। मौके की नजाकत को भांपते हुए शिवपाल ने जीताने का वचन दे दिया। अब पूरी तन्मयता से मैदान में हैं लेकिन जब तब वह सपा के सत्तासीन नहीं होने के लिए अखिलेश को जिम्मेदार ठहराने से नहीं चूकते हैं। इस रणनीति के जरिए वह अपनी अनदेखी का मुद्दा भी उठाते रहते हैं।
भाजपा से भी मनमाफिक नहीं मिली तवज्जो
शिवपाल के सामने एक तरफ परिवार था तो दूसरी तरफ भाजपा के साथ सत्ता सानिध्य। शिवपाल ने परिवार चुना। इसके पीछे कई वजहें हैं। एक बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि पिछले कुछ दिनों से भाजपा उस तरह की तवज्जो नहीं दे रही थी, जिसकी वह ख्वाहिशमंद थे। लोकसभा चुनाव के दौरान तवज्जो मिलेगी, इस पर भी भाजपा ने पत्ते नहीं खोले थे। दूसरी तरफ परिवार व रिश्तेदार नेताजी की अंतिम इच्छा का हवाला देकर दबाव बना रहे थे।
बेटे आदित्य यादव के भविष्य की भी चिंता
शिवपाल के सामने अब बेटे आदित्य यादव और उनके साथ निरंतर कंधे से कंधा मिलाकर संघर्षशील रहने वालों के भविष्य को लेकर भी चिंता है। यही वजह है कि वह भरे मंच से परिवार के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देने का एलान कर रहे हैं। इनके सियासी मायने भी हैं। जानकारों का कहना है कि विपरीत हालात में भी सपा के साथ उनकी सियासी हैसियत शीर्ष पर है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भले एक ही टिकट देकर उन्हें लाचार किया, लेकिन खुले मंच पर वह शिवपाल सिंह के खिलाफ नहीं बोलते हैं। आमना-सामना होने पर पैर छू कर आशीर्वाद लेने से पीछे नहीं रहते हैं। रिश्तों की इस डोर ने भी शिवपाल के कदम को भाजपा की ओर बढ़ने से रोक दिया।
शिवपाल की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
डिंपल यादव को जीताने के अभियान में जुटे शिवपाल सिंह की मुश्किलें बढ़नी तय हैं। अभी तो उनकी सुरक्षा में कटौती हुई है। भविष्य में कार्यालय समेत अन्य संकट आने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। शिवपाल को भी इन संकटों का आभास है। इसकी पुष्टि उनके बेटे आदित्य ने कर दी है। उन्होंने मीडिया से कहा कि भाजपा जो कर रही है, वह अप्रत्याशित नहीं है।