लखनऊ। दो वर्ष पहले लापता हुई शिवानी के घर लौट आने के मामले में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। बख्शी का तालाब के नवीकोट नंदना निवासी शिवानी 27 माह बाद घर लौट आईं। इस प्रकरण में मई 2024 से ससुरालवाले संदेह के घेरे में रहे। उन्हें कई बार पुलिस के सवालों का सामना करना पड़ा। हालांकि, अब शिवानी के लौटने के बाद पुलिस पर ही सवाल उठ रहे हैं।
दो मई 2024 की सुबह शिवानी घर से निकली थीं लेकिन वापस नहीं लौटीं। 16 जुलाई 2024 को सैरपुर में आईआईएम रोड पर नाले में मिले महिला के शव को शिवानी का बता दिया गया था। शिवानी के घरवालों ने शिनाख्त के बाद अंतिम संस्कार भी कर दिया था। डीएनए टेस्ट में पता चला था कि शव शिवानी का नहीं था। अब सवाल ये हैं कि जब शिवानी जिंदा है तो वह शव किसका था? पुलिस ने उस शव के बारे में पता लगाने की कोशिश क्याें नहीं की? आखिर किस आधार पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था? इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
एसीपी विकास कुमार पांडेय ने बताया कि शिवानी के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद यह पता चलेगा कि वह इतने दिन तक कहां और किसके साथ थीं। सभी पहलुओं पर छानबीन की जा रही है।