लखनऊ। गोमती तट पर लगे उत्तराखंड महोत्सव में जानवरों के बालों से तैयार गर्म कपड़ों की खूब मांग है। यहां पश्मीना शाल तो है ही, लेकिन इससे कहीं ज्यादा मांग खरगोश, भेड़ व अन्य जानवरों के बालों को मिलाकर बनी शॉलों की हो रही है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होती है। इनकी कीमत एक हजार से लेकर 12 हजार रुपये तक है।
महोत्सव में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के व्यापारियों ने भी स्टॉल लगाए हैं। लोग इन स्टॉलों पर बिक रहे गर्म कपड़ों की उपयोगिता के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं। मीडिया प्रभारी राजेंद्र सिंह कनवाल ने बताया कि 51 नंबर स्टॉल पर जानवरों के बाल से तैयार गर्म कपड़ों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। खास बात है कि इन्हें हाथ से ही तैयार किया जाता है जिसमें 15 दिन से एक माह तक का समय लगता है।
जानवरों के बाल से बने गर्म कपड़ों की कंपनी के संचालक निशांत पांडेय ने बताया कि ये कपड़े शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता विकसित करते हैं। साथ ही कपड़ों की प्राकृतिक चमक भी बनी रहती है। ये कपड़े बेहद हल्के होने के साथ ही अपने इन्सुलेटिंग गुण (संवाह रोकना) और रेशमी बनावट की वजह से आकर्षक होते हैं।
अंगोरा खरगोश, भेड़ व बैल के बाल हैं काफी उपयोगी
निशांत पांडेय ने बताया कि अंगोरा खरगोश, भेड़, बैल व अन्य जानवरों के बालों से बने ऊनी कपड़े अपेक्षाकृत ज्यादा कोमल होते हैं। ये अपनी रेशमी बनावट और प्राकृतिक रंगों की वजह से काफी पसंद किए जाते हैं। इसमें सफेद, काला, चॉकलेटी समेत कई रंग शामिल होते हैं। इस ऊन से बने उत्पादों की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। हल्के डिटर्जेंट के साथ गुनगुने पानी में हाथ से इन्हें धोना पड़ता है।