जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि यूपी में सीटों के तालमेल के बाबत सपा से बात होना अभी बाकी है।
हाल ही में बना ग्यारह दलों का मोर्चा सिर्फ दिल्ली में है, उसके बाहर चुनाव मैदान में उनके बीच दोस्ताना जंग की भी छूट है।
उन्होंने चुनाव से पहले पीएम कैंडीडेट घोषित करने को एक बड़ी बीमारी बताया। कहा, देश में इस तरह के दर्जनों कैंडीडेट सामने आ चुके हैं।
लोकसभा सांसद शरद यादव जद (यू) की एक बैठक में शिरकत करने आए थे। इसी दौरान प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने बताया कि भाजपा तय राष्ट्रीय एजेंडे से अलग हटी।
इसलिए उसके साथ 17 साल पुराना गठबंधन तोड़ना पड़ा।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी रथ यात्रा निकालकर अयोध्या में मंदिर का शिलान्यास करना चाहते थे, लेकिन उनके दल ने तब ऐसा होने से रोका।
हमने कभी सांप्रदायिक ताकतों को वो नहीं करने दिया, जो वे करना चाहती हैं। हां, हम इतना जरूर मानते हैं कि धर्म निरपेक्षता विसंगतियों को साथ लेकर चलने वाला सामाजिक ढांचा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए दिल्ली में ‘पहले मोर्चे’ का गठन किया गया है। व्यवहारिक तौर पर जो माने, वो ठीक और जो न माने वो भी ठीक।
सपा से बातचीत बाकी
शरद यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनावी गठबंधन के बाबत सीपीआई और सीपीएम से बात हो चुकी है, लेकिन यहां सबसे बड़ी पार्टी सपा से बात होना अभी बाकी है।
मुलायम पीएम, चुनाव करेगा तय
क्या पहले मोर्चे के पक्ष में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने पर मुलायम सिंह यादव को बतौर प्रधानमंत्री स्वीकार करेंगे? इसका उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। कहा, मोर्चा अपना नेता चुनाव बाद तय करेगा। पीएम कैंडीडेट घोषित करने की तमाम पार्टियों में बीमारी हो गई है और यह बीमारी बढ़ती ही जा रही है।
पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह या देवगौड़ा को चुनाव बाद ही कमान सौंपी गई थी, पहले नहीं। उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा।