लखनऊ। शरद पूर्णिमा पर रविवार को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। रात में चांदनी में खीर रखने के साथ ही भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा निभाई जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृततुल्य गुण होते हैं। इसी मान्यता के चलते लोग खीर को चांदनी में रखते हैं और अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र, अलीगंज के ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 25 अक्तूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय 25 अक्तूबर को शाम 4:47 बजे होगा। इस दिन शाम 7:22 बजे तक रेवती नक्षत्र रहेगा, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र लग जाएगा। पूर्णिमा पर हर्षण योग के बाद वज्र योग रहेगा। शरद पूर्णिमा को कौमुदी पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन महारास रचाया था। वहीं, समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी के प्रकट होने की मान्यता के कारण इस दिन लक्ष्मी पूजन का भी विशेष महत्व है।
ऐसे करें पूजन
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, श्रद्धालुओं को सुबह स्नान के बाद भगवान श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु या अपने इष्टदेव की पूजा करनी चाहिए। रात में गाय के दूध से खीर बनाकर उसमें घी और चीनी मिलाएं। आधी रात में भगवान को भोग लगाने के बाद खीर को चांदनी में रख दें। चंद्रमा को अर्घ्य देकर भजन-कीर्तन भी करें। मान्यता है कि चांदनी में रखी खीर का अगले दिन सूर्योदय से पहले प्रसाद के रूप में सेवन करने से आरोग्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।