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तलाशे जाएंगे 'फर्जी शंकराचार्य', होगी कार्रवाई

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साईं और शंकराचार्य विवाद एक बार फिर गरमाने जा रहा है। साईं के समर्थन में खड़े संतों पर कार्रवाई हो सकती है। नासिक कुंभ के दौरान इस पर बड़ा निर्णय लिया जाएगा। अखाड़े के संत इस बारे में किसी प्रकार के भ्रम को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि सनातन धर्म की मर्यादा का पालन सभी को करना होगा।
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आपसी मतभेदों को दरकिनार करके ही बयानबाजी की जानी चाहिए। शुक्रवार को बाघम्बरी मठ गद्दी में अखाड़ों के संतों की सभा हुई। निरंजनी अखाड़े के सचिव, बाघम्बरी मठ गद्दी के महंत, सनातनधर्म रक्षा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि ने कहा कि ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर शंकरचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और गोवर्द्धनपीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, चार पीठ के शंकराचार्यों के प्रतिनिधियों, सभी अखाड़ों और सनातन धर्म के सभी संप्रदायों के संतों की मौजूदगी में कवर्धा धर्मसंसद के निर्णय ‘साईं न तो संत न गुरु न भगवान’ पर मुहर लगाई है।

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फर्जी शंकराचार्य हैं कौन?

इससे अलग बात करने वालों की बातों का कोई मायने नहीं है। उन्होंने कहा नासिक कुंभ में फर्जी शंकराचार्यों पर भी कार्रवाई की जाएगी। निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि भ्रामक बयानबाजी उचित नहीं है। सभी को धर्मसंसद के निर्णय की मर्यादा रखनी होगी। बैठक में पंचायती निर्वाणी अखाड़े के श्रीमंहत जगदीश पुरी, आनंद अखाड़े के महंत राजेश्वरानंद आदि मौजूद रहे।

जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी हरिगिरि ने मोबाइल पर हुई बातचीत में स्पष्ट किया कि साईं बाबा को ब्राह्मण बताना हास्यास्पद है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि साईं बाबा से संबंधित उपलब्ध दस्तावेज उन्हें मुस्लिम फकीर ही सिद्ध करते हैं। शिरडी में उनकी कब्र मौजूद है।

सद्गृहस्थ संत देवप्रभाकर शास्त्री दद्दा जी का कहना है सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च है। अगर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी को पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन में कहीं कोई कमी लगती है तो मैं इस बारे में उनसे मार्गदर्शन लेकर उसे दूर करने की कोशिश करूंगा। वह मेरे पूज्य व मार्गदर्शक हैं। उनका सम्मान सर्वोच्च है लेकिन साईं पर विवाद अनुचित है।
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