लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के आठ शोध प्रस्तावों को आईसीएमआर से मंजूरी मिली है। इसके लिए करीब 20 करोड़ रुपये की फंडिंग मिलेगी। इनमें पांच प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर की विशेष कॉल और तीन इंटरमीडिएट कैटेगरी में चुने गए हैं।
इन शोध परियोजनाओं में कैंसर, लिवर की बीमारी, गर्भावस्था में एनीमिया, किडनी ट्रांसप्लांट, वायरल हेपेटाइटिस और किडनी की बीमारी शामिल हैं। वैज्ञानिक अत्याधुनिक तकनीक के जरिये बीमारियों की शुरुआती पहचान, बेहतर इलाज और मरीज के अनुसार उपचार के नए विकल्प तलाशेंगे।
कैंसर और ट्रांसप्लांट पर खास नजर
इनके तहत ग्लियोब्लास्टोमा यानी गंभीर ब्रेन कैंसर में मरीज से तैयार ऑर्गेनॉइड के जरिये बीमारी और संभावित इलाज को समझा जाएगा। किडनी ट्रांसप्लांट मरीजों में नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग से वायरस के दोबारा सक्रिय होने और प्रत्यारोपित किडनी में खराबी के शुरुआती संकेत खोजे जाएंगे। कैंसर इम्यूनोथेरेपी से जुड़ी एक परियोजना में इलाज के प्रति प्रतिरोध के कारणों पर भी शोध होगा।
नवजातों के लिए विकसित होगी तकनीक
नियोनेटोलॉजी की परियोजना में नवजातों को दी जाने वाली पोषण सामग्री तैयार करने की स्वचालित प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे मानवीय गलतियां कम करने और इलाज की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी। निदेशक प्रो. आरके धीमन ने इसे संस्थान के मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम और मरीजों से जुड़ी जरूरतों पर केंद्रित शोध की बड़ी उपलब्धि बताया।