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यूपी में बच्चों के साथ हुए यौन शोषण मामलों की जानकारी के लिए पढ़ें खबर

Sat, 03 Sep 2016 12:44 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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अपराध - फोटो : demo
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महिलाओं और नाबालिगों से दुराचार के मामले भले ही घटे हो लेकिन, उत्तर प्रदेश में बच्चों से अपराध खासतौर पर यौन शोषण के मामले बढ़े हैं।
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देश भर में बच्चों के साथ अपराध में जहां सवा पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है वहीं यूपी में 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर पोक्सो के तहत देश के 20 प्रतिशत मामले प्रदेश से हैं, या कहें यौन शोषण का शिकार हर पांचवां बच्चा प्रदेश से है।

इनमें से अधिकतर लड़कियां हैं। इस वर्ष एनसीआरबी के आंकड़ों में विसंगतियां पैदा कर बच्चों से होने वाले अपराधों को कम करके दिखाने की भी कोशिश हुई है। प्रदेश में बच्चों पर हो रहे अपराधों को दर्शाती एक रिपोर्ट।
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उत्तर प्रदेश को बच्चों पर होने वाले अपराधों में सबसे आगे रखा जाता रहा है। लेकिन इस वर्ष करीब साढ़े तीन हजार मामले कम दर्ज किए गए हैं। 

एनसीआरबी के अनुसार उत्तर प्रदेश में बच्चों से अपराध के 2014 में 14,835 दर्ज किए गए थे जो देश में हुए कुल 89,423 अपराधों का 16.58 प्रतिशत था।

 देश में इस वर्ष इन अपराधों की संख्या 94,172 पर पहुंच गई तो यूपी में इनकी संख्या आश्चर्यजनक रूप से 11,420 रह गई है। इस तरह बच्चों पर अपराध के मामलों 23 प्रतिशत की गिरावट दिखायी जा रही है। 

बच्चों से दुराचार के मामलों में विसंगति

अपराध - फोटो : demo pic
अपराधों की संख्या के लिहाज से यूपी को महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के बाद तीसरे स्थान पर रखा गया है। उत्तर प्रदेश में पोक्सो के तहत 2015 में 3,637 मामले दर्ज किए गए थे, जो देश भर में दर्ज 8990 मामलों का करीब 40 प्रतिशत था।

लेकिन इस वर्ष जहां देश भर में इनकी संख्या 15,039 हो गई, उत्तर प्रदेश में इस एक्ट के तहत 3,078 मामले दर्ज किए गए हैं। पोक्सो एक्ट का सेक्शन 3 व 4 जो सब से जघन्य कहे जाने वाले दुराचार के मामलों में लगाया जाता है देश भर में 6,723 मामलों में लगा गया। उत्तर प्रदेश में यही सेक्शन 1,336 मामलों में लगाना पड़ा।

प्रदेश में एनसीआरबी के आंकड़ों में पोक्सो के तहत सेक्शन चार में 1,336 बच्चों को पीड़ित बताया गया है। जबकि कुल 596 बच्चों से ही दुराचार किया गया।

इस लिहाज से बच्चों से दुराचार के मामलों में विसंगति पैदा की गई है। जिससे उनके साथ होने वाली दुराचार की घटनाओं की सही-सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

करीब 8.85 करोड़ बच्चों की जनसंख्या वाले प्रदेश के हर एक लाख बच्चों में से औसतन 12 बच्चे किसी न किसी अपराध के शिकार हैं। इस लिहाज से भी यूपी का स्थान महाराष्ट्र और मप्र. के बाद तीसरे पर रहा।
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लखनऊ में हुए बच्चों से हिंसा के सर्वाधिक मामले

डेमो
बीते वर्ष प्रदेश ने 488 बच्चों की हत्याएं देखीं जो देश में हुई 1937 बच्चों की हत्याओं में सर्वाधिक थी। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दूसरे स्थान पर रहे महाराष्ट्र में 234 बच्चे यानी आधे से भी कम बच्चे इस जघन्य अपराध का शिकार हुए।

प्रदेश में 29 बच्चों का फिरौती के लिए अपहरण किया गया जो किसी भी प्रदेश से अधिक है। पूरे देश में इस तरह के 147 मामले दर्ज हुए। पश्चिम बंगाल में 15, दिल्ली 13 और कनार्टक में 10 बच्चों का अपहरण किया गया।

 बच्चों के लिए कुल अपहरण में महाराष्ट्र (7,150) और दिल्ली (6,881) के बाद यूपी 5,933 अपहरण के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इनमें सर्वाधिक अपहरण लड़कियों के थे जिनमें से 4,462 लड़कियों का अपहरण जबरन शादी के लिए किया गया।
लखनऊ में हुए बच्चों से हिंसा के साथ सर्वाधिक मामले
शहर  व  पोक्सो का ‌ व‌िवरण
लखनऊ -  76
मेरठ- 64
आगरा - 52
वाराणसी- 27
गाजियाबाद- 24
कानपुर- 6
इलाहाबाद- 0
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