मरीजों को लेकर इधर-उधर भाग रहे हैं तीमारदार
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रेजीडेंट डॉक्टरों की जिद ने बुधवार को केजीएमयू में सात और मरीजों की जान ले ली। इमरजेंसी और ओपीडी सेवाएं देख रहे वरिष्ठ चिकित्सक बगैर रेजीडेंट के असहाय नजर आए। बहुत गंभीर मरीजों को ही सीनियर डॉक्टरों ने हाथ लगाया।
बाकी मरीजों को हड़ताल का हवाला देकर लौटाया जाता रहा। करीब दो हजार मरीज लौटाए गए। 20 से ज्यादा ऑपरेशन टले। भर्ती मरीजों का भी बुरा हाल है। उनका इलाज सिर्फ नर्सों के भरोसे चल रहा है। उधर, रेजीडेंट डॉक्टरों के समर्थन के बाद चिकित्सा छात्र-छात्राओं ने बुधवार को अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
पीजीएमईई में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के चिकित्सकों को 30 फीसदी अंकों की वरीयता देने को लेकर रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के चलते केजीएमयू में इलाज की व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई है।
ट्रॉमा सेंटर में वरिष्ठ डॉक्टरों के बावजूद बुधवार को सांस लेने में दिक्कत के साथ भर्ती हुई छेदाना, श्रावस्ती निवासी मालती देवी, न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती कानपुर निवासी अर्पिता शुक्ला, सुल्तानपुर की जद्दो बानो और गैस्ट्रोइंट्राइटिस के गंभीर मरीज फिरोज की मौत हो गई।