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यूपीः फर्जीवाड़े में मंत्री के निजी सचिव समेत सात गिरफ्तार

Mon, 15 Jun 2020 06:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

  • एसटीएफ ने किया खुलासा, अभियुक्तों के पास से 28.32 लाख नगद और सचिवालय के 2 कूटरचित परिचय पत्र बरामद 
  • निजी सचिव के कमरे को बनाया था पशुपालन विभाग के उपनिदेशक का कार्यालय
  • पूरी डील यहीं हुई और फर्जी वर्क ऑर्डर भी दिया, बंटी-बबली के खेल में कई और की तलाश
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डेमो - फोटो : डेमो
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विस्तार
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पशुधन विभाग में करोड़ों का ठेका दिलाने के बदले इंदौर के व्यापारी से 9.72 करोड़ रुपये ऐंठने के मामले में यूपी एसटीफ ने रविवार को पशुधन राज्यमंत्री जय प्रकाश निषाद के निजी सचिव धीरज कुमार देव, प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, कथित पत्रकार एके राजीव, पत्रकार अनिल राय, रुपक राय, उमाशंकर तिवारी और जालसाज आशीष राय को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले इस मामले में शनिवार देर रात हजरतगंज थाने में 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।    
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आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि पशुधन विभाग में 240 करोड़ रुपये के किसी टेंडर के नाम पर फर्जीवाड़े का जाल बुना गया। इसका शिकार बने इंदौर (मध्य प्रदेश) के व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया। भाटिया को जाल में फंसाने के लिए पशुधन राज्यमंत्री के निजी सचिव के कमरे का इस्तेमाल किया गया। मंजीत को झांसे में लेने के लिए मंत्री की गाड़ी में बैठा कर उसे सचिवालय लाया गया। 

यहां निजी सचिव धीरज कुमार देव के कार्यालय को फर्जी उप निदेशक, पशुपालन विभाग एसके मित्तल का कार्यालय बता कर जहां आशीष राय पहले से बैठा था, उससे मिलवाया गया। इसके लिए बकायदा एसके मित्तल के नाम की तख्ती भी निजी सचिव के कमरे के बाहर लगा दी गई। यहीं पूरी डील हुई और बारी-बारी करके मंजीत से ठेका दिलाने के नाम पर 9.72 करोड़ रुपये ले लिए गए। 
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पैसा मांगने पर धमकाने लगे
 सूत्रों का कहना है कि मंजीत से कुल 15 करोड़ रुपये का सौदा हुआ था। 9.72 करोड़ रुपये मिलने के बाद फर्जी वर्क आर्डर मंजीत सिंह भाटिया को थमा दिया गया। लेकिन मंजीत को जब इस वर्क आर्डर की हकीकत पता चली तो वह गहरे सदमे में चला गया। उसने काम दिलाने के नाम पर ठगी करने वालों के सामने जब पैसे वापस करने की मांग की तो सचिवालय के अधिकारी और कथित पत्रकार मिलकर उसे धमकाने लगे। 

नाका पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल 
सूत्रों का कहना है तो जब मंजीत ने बार-बार पैसे वापस मांगे तो कथित पत्रकार एके राजीव ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए लखनऊ की नाका पुलिस से मंजीत को उठवा लिया। इसमें एके राजीव की मदद नाका थाने के सिपाही ने की। मंजीत ने एसटीएफ को बताया कि उसके एनकाउंटर तक की धमकी दी गई। वह किसी तरह से नाका पुलिस की चंगुल से छूटा और फिर किसी माध्यम से अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाई। 

मुख्यमंत्री ने इस मामले की गोपनीय तरीके से जांच के लिए एसटीएफ को लगाया। एसटीएफ की जांच में जालसाजी की परत दर परत खुलने लगी। इसके बाद मंजीत की तहरीर पर हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज करा कर गिरफ्तारियां शुरू की गई। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों के पास से 28.32 लाख रुपये नगद, सचिवालय का 2 कूटरचित परिचय पत्र बरामद किया गया है। 

सूत्रों का कहना है कि कथित पत्रकार एके राजीव पिछले 15 साल से इसी तरह के कामों में लिप्त रहा है। अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग के नाम पर भी कई लोगों को अपने झांसे में ले चुका है। एसटीएफ और लोकल पुलिस मिलकर इस मामले में अन्य नामजद आरोपियों की तलाश कर रही है।
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