बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों का सत्र भी अब माध्यमिक शिक्षा परिषद की तर्ज पर एक अप्रैल से शुरू होगा। विभागीय अधिकारी इसके आधार पर अभी से तैयारियां शुरू कर दें ताकि मार्च में ही रिजल्ट घोषित हो जाए।
बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी ने बृहस्पतिवार को निशातगंज स्थित निदेशालय में आयोजित बैठक में अधिकारियों को यह निर्देश दिए। उन्होंने निजी स्कूलों की तर्ज पर प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को कक्षा एक से ही अंग्रेजी की अच्छी शिक्षा पर जोर देने को कहा है।
उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारियों से कहा कि वे शिक्षा की गुणवत्ता ठीक करने पर पूरा ध्यान दें। समय से स्कूलों का निरीक्षण करके खामियां दूर की जाएं।
बच्चों की उपस्थिति में कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की सारी जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा अधिकारियों की है। बीएसए शिक्षक व शिक्षिकाओं के साथ बैठक कर उन्हें गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के लिए प्रेरित करेंगे।
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि परिषदीय स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के साथ उन्हें नैतिक शिक्षा भी दी जाए। ब्लाक स्तर पर एक आदर्श स्कूल बनाने के निर्देश पिछली बैठक में दिए गए थे, लेकिन बीएसए ने अभी तक इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं किया।
इसलिए उन्होंने अभियान चलाकर इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कक्षा एक के बच्चों को अंग्रेजी व गणित की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने के साथ खेलकूद को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारियों को दी है।
उन्होंने कहा, बीएसए हर ब्लॉक पर जाकर देखेंगे कि शिक्षिकाएं ठीक से पढ़ा रही हैं या नहीं। गांव के स्कूलों में बच्चों की कमी मिली तो ग्राम प्रधान व प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायत बर्दाश्त नहीं होगी।
बैठक में नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले, मुफ्त यूनिफार्म वितरण तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की प्रगति की समीक्षा भी की गई।