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लखनऊ में यातायात पुलिस लगवाती है मलाईदार चौराहों की बोली

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राजधानी में एक ही चौराहे पर बार-बार की जा रही तैनाती - फोटो : ??? ?????
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भानु शुक्ल
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पुलिस कमिश्नर को पिछले दिनों किसी ने पत्र भेजकर ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में कहा है कि शहर के मलाईदार (कमाई वाले) चौराहों पर तैनाती के लिए मोटी रकम लेकर टीआई, टीएसआई, हेड कांस्टेबल व सिपाहियों की ड्यूटी लगाई जा रही है।
पत्र को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर ने एलआईयू इंस्पेक्टर को जांच सौंपी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि टीआई से लेकर तमाम सिपाही तक एक ही चौराहे पर बार-बार तैनात किए जा रहे हैं। ऐसे में शिकायत प्रथम दृष्टया सही साबित हुई है।
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पुलिस कमिश्नर को पिछले दिनों डाक द्वारा भेजा गया एक पत्र मिला। इसमें कहा गया था कि शहर के मलाईदार (कमाई वाले) चौराहों को मोटी रकम लेकर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के हाथों बेचा जा रहा है।
यहां जिन टीआई, टीएसआई, हेड कांस्टेबल व सिपाहियों की तैनाती है, उन्हीं को बार-बार उसी चौराहे पर तैनात किया जा रहा है।
जबकि यातायात मुख्यालय की नियमावली के अनुसार टीआई, टीएसआई व हेड कांस्टेबल की ड्यूटी किसी भी चौराहे पर एक माह के लिए ही लगनी चाहिए और सिपाहियों की तैनाती का चौराहा प्रत्येक सप्ताह बदलना चाहिए।
इन सबके बावजूद कुछ टीआई, टीएसआई, एचसीपी व कई सिपाहियों को बार-बार उसी मलाईदार चौराहे पर तैनाती मिल रही है, जहां वे एक माह के बजाय पहले ही कई माह तैनात रह चुके हैं।
पत्र में दो टीआई, चार टीएसआई, दो एचसीपी, एक हेड कांस्टेबल (प्रोन्नत) व कई सिपाहियों के नाम तक लिखे हैं।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने एलआईयू के इंस्पेक्टर संजीव कुमार यादव को जांच सौंपी।
इंस्पेक्टर ने जांच शुरू करने के साथ ही ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के ड्यूटी रजिस्टर भी खंगाले तो शिकायत सही निकली।
हालांकि इस बारे में एलआईयू इंस्पेक्टर संजीव कुमार यादव का कहना है कि अभी जांच चल रही है। रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
ये हैं मलाईदार तिराहे-चौराहे
कानपुर रोड पर अमौसी मोड़ व शहीद पथ मोड़, पीजीआई, उतरेठिया पुल के नीचे, अहिमामऊ, कमता, चिनहट, पॉलीटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, भिठौली, बुद्धेश्वर, दुबग्गा, बारा बिरवा और तेलीबाग चौराहा। इन सभी चौराहों से दूसरे जनपदों से आने वाले चौपहिया वाहन व ट्रक गुजरते हैं। जिनकी चेकिंग के दौरान कागजातों में खामियां निकालकर मोटी रकम वसूली जाती है। फिर इसका बंटवारा होता है।
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तबादले के बावजूद डटे हैं पीआरओ
डीसीपी ट्र्रैफिक के पीआरओ महेश पाठक का तीन माह पहले पश्चिम जोन में तबादला हुआ था, मगर इन्होंने अब तक चार्ज नहीं छोड़ा। इसी तरह कई अन्य यातायात पुलिसकर्मी भी लंबे समय से एक ही पद पर जमे हैं।
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