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पर्यावरण दिवसः लॉकडाउन खत्म होते ही बिगड़ी हवा की सेहत, विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

Thu, 04 Jun 2020 01:59 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन में राजधानी की हवा की सेहत बेहतर बनी रही। हालांकि, 30 मई को लॉकडाउन खत्म होने के तुरंत बाद फिर से प्रदूषण बढ़ा हुआ मिल रहा है। वाहनों की संख्या सड़क पर बढ़ने के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) भी बढ़ गया।
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सबसे बुरे हालात तालकटोरा और लालबाग में मिल रहे हैं। यहां एक्यूआई 190 तक रिकॉर्ड हो रहा है। सीधे तौर पर यह हवा में जहर घुलने का इशारा है।  विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन की तरह हवा को साफ बनाए रखने के लिए बड़े उपाय करने की जरूरत नहीं है।

छोटे-छोटे प्रयासों से ही हवा को शुद्ध और सांस लेने लायक बनाए रखा जा सकता है। अप्रैल, मई व जून के आंकड़ों को देखा जाए तो अप्रैल में जब सख्ती कम थी, उस समय अधिक एक्यूआई था। मई में सख्ती ने एक्यूआई को 100 के नीचे पहुंचा दिया। जून में लॉकडाउन खत्म होते ही एक्यूआई फिर बढ़ गया।
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लॉकडाउन में हवा सुधरी

तारीख        एक्यूआई
1 अप्रैल        136
2 अप्रैल        111
3 अप्रैल         73
1 मई            88
2 मई            66
3  मई           66
1 जून           84
2 जून           96
3 जून         119

इलाकों में इस तरह रहा हाल
तारीख       तालकटोरा    गोमतीनगर    लालबाग    अलीगंज
एक अप्रैल       186            --             154         100
दो अप्रैल         146           62            121           58
तीन अप्रैल         76           67            108           43
एक मई            68           96              78           92
दो मई              65           57              60           74
तीन मई            72           68              65           64
एक जून          133           62             106          77
दो जून            138           50             118          67
तीन जून          190           80             144         90

 
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पानी का छिड़काव ही बदल सकता है हालात

लखनऊ में यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी रहे डॉ. कुलदीप मिश्र का कहना है कि वायु प्रदूषण को कम रखना बड़ी चुनौती नहीं है। अगर सरकारी विभाग खास तौर पर नगर निगम उचित कदम उठाएं तो एक्यूआई खुद कम हो जाएगा। लॉकडाउन से स्पष्ट है कि वाहनों से उड़ने वाली धूल से एक्यूआई बढ़ता है।

हमारी प्राथमिकता इसे कम करने पर होनी चाहिए। इसके लिए रोजाना दोपहर व शाम करीब 15 फीट से स्प्रिंकलर कर पानी का छिड़काव हो। यह पूरे साल होना चाहिए। निर्माण वाली साइट लखनऊ में बहुत अधिक नहीं हैं। बिल्डर्स के भरोसे छोड़ने की जगह उनसे शुल्क लेकर नगर निगम ही पानी का छिड़काव करे।

इसके लिए पानी भी एसटीपी से मिल सकता है, जो रोजाना करीब 500 एमएलडी शोधित पानी निकालता है। इसके अलावा जगह चिह्नित कर जाम लगने से रोका जाए। उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं 30 मीटर पर छूटता है।

इससे तालकटोरा या दूसरे औद्योगिक इलाकों में तो प्रदूषण नहीं बढ़ सकता, लेकिन इसका असर कुछ दूरी पर दूसरे इलाकों में होगा। असली ध्यान हमें औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों के रखरखाव पर देना होगा, जो बदहाल हैं। इन पर गाड़ियां निकलते ही यहां बुरी तरह धूल उड़ती है। यूपीपीसीबी जैसी संस्थाओं को भी अपने विभागों पर दबाव बनाकर काम कराने ही होंगे।
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