लखनऊ में यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी रहे डॉ. कुलदीप मिश्र का कहना है कि वायु प्रदूषण को कम रखना बड़ी चुनौती नहीं है। अगर सरकारी विभाग खास तौर पर नगर निगम उचित कदम उठाएं तो एक्यूआई खुद कम हो जाएगा। लॉकडाउन से स्पष्ट है कि वाहनों से उड़ने वाली धूल से एक्यूआई बढ़ता है।
हमारी प्राथमिकता इसे कम करने पर होनी चाहिए। इसके लिए रोजाना दोपहर व शाम करीब 15 फीट से स्प्रिंकलर कर पानी का छिड़काव हो। यह पूरे साल होना चाहिए। निर्माण वाली साइट लखनऊ में बहुत अधिक नहीं हैं। बिल्डर्स के भरोसे छोड़ने की जगह उनसे शुल्क लेकर नगर निगम ही पानी का छिड़काव करे।
इसके लिए पानी भी एसटीपी से मिल सकता है, जो रोजाना करीब 500 एमएलडी शोधित पानी निकालता है। इसके अलावा जगह चिह्नित कर जाम लगने से रोका जाए। उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं 30 मीटर पर छूटता है।
इससे तालकटोरा या दूसरे औद्योगिक इलाकों में तो प्रदूषण नहीं बढ़ सकता, लेकिन इसका असर कुछ दूरी पर दूसरे इलाकों में होगा। असली ध्यान हमें औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों के रखरखाव पर देना होगा, जो बदहाल हैं। इन पर गाड़ियां निकलते ही यहां बुरी तरह धूल उड़ती है। यूपीपीसीबी जैसी संस्थाओं को भी अपने विभागों पर दबाव बनाकर काम कराने ही होंगे।