डीजीपी के प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में जो भी प्रकरण सामने आए, उनकी जांच के आदेश दिए गए हैं। ऐसे अन्य सिपाहियों की भी शिनाख्त की जा रही है जो सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर इस प्रकरण में सिपाहियों को उकसाने की कोशिश कर रहे थे। लखनऊ के तीन सिपाहियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। शिथिल पर्यवेक्षण के लिए संबंधित तीन थाना प्रभारियों को भी हटाया जा चुका है।
डीजीपी मुख्यालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही उन खबरों का खंडन किया है जिनमें एटा के निलंबित सिपाही को एटा के प्रतिसार निरीक्षक के सरकारी आवास में नजरबंद करने और उसका मोबाइल छीन लेने की खबरें प्रसारित की जा रही थीं।
डीजीपी के प्रवक्ता ने बताया कि 5 अक्तूबर को आरक्षी सर्वेश कुमार चौधरी को निलंबन के दौरान उसके आवेदन पर मुख्यालय से बाहर रहने की अनुमति दी गई है। वह अपने परिजनों के साथ गया है। सर्वेश ने नौकरी से इस्तीफे की पेशकश की है, जिसका पत्र एसएसपी एटा को मिल गया है।