प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए हर रास्ता तलाश रही सरकार की अप्रवासी भारतीयों पर भी नजर है। सरकार ने शासन स्तर पर अलग से नॉन रेजीडेंट इंडियंस (एनआरआई) विभाग बनाने का फैसला कर लिया है।
इस कार्य को समयबद्ध तरीके से करने के लिए इसे नए वित्तीय वर्ष के विकास एजेंडे में शामिल कर लिया गया है।
प्रदेश के दो लाख से ज्यादा एनआरआई हैं। इनके परिवारीजन प्रदेश में रहते हैं। सरकार सूबे में निवेश के लिए इन अप्रवासी भारतीयों की क्षमता का उपयोग करना चाहती है।
इनकी समस्याओं के समाधान के लिए पहले ही उद्योग बंधु में एनआरआई सेल का गठन किया जा चुका है।
शासन स्तर पर एनआरआई के लिए अलग से विभाग के गठन का भी सुझाव आता रहा है।
उच्चस्तरीय सहमति के बाद शासन ने वर्ष 2014-15 के विकास एजेंडे में नए विभाग के गठन को शामिल कर लिया है।