दरअसल, जल निगम के गठन के बाद से एमडी समेत अन्य प्रमुख पदों पर इंजीनियरों का वर्चस्व था। पिछले दिनों समीक्षा बैठकों में निगम की कार्यशैली को लेकर मुख्य सचिव से लेकर मुख्यमंत्री तक ने कई बार सवाल उठाए और सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी जल निगम की कार्यशैली में कोई खास सुधार नहीं दिखा।
इसके मद्देनजर सरकार ने एमडी समेत तीन अन्य पदों पर आईएएस व वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों का बैठाने का फैसला किया था।
इसी कड़ी में नगर विकास विभाग ने इन पदों पर नियुक्ति से संबंधित ‘उप्र जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था अधिनियम-1975’ की धारा-4 की उपधारा (2) के खंड ‘क’ में संशोधन प्रस्ताव तैयार किया था।