इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर 27 जून 2018 को जेल भेजा दिया था। इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अधिशाषी अधिकारी आदित्य प्रकाश को जांच अधिकारी नामित किया गया था। उनके स्थानांतरण के बाद अधिशाषी अधिकारी विनीत श्रीवास्तव ने जांच पूरी की।
इससे पहले लिपिक सुनील को निलंबित कर दिया गया था। जेल से जमानत पर छूटने के बाद आरोपी लिपिक द्वारा आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों का सही व संतोषजनक उत्तर न देने पर नगराम नगर पंचायत की बोर्ड मीटिंग में मामला रखा गया। बृहस्पतिवार को सुनील श्रीवास्तव को बर्खास्त करते हुए गबन की रकम की वसूली का आदेश जारी कर दिया गया।