पाठक ने सोमवार को लिखे पत्र में कहा कि बीते एक सप्ताह से पूरे लखनऊ से उनके पास मरीजों और उनके परिजनों के फोन आ रहे हैं, जिन्हें समुचित इलाज नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ में प्रतिदिन चार से पांच हजार मरीजों की तुलना में अस्पतालों में बेड की संख्या बहुत कम है। निजी पैथोलॉजी में कोविड की जांच बंद करा दी गई है, जबकि सरकारी अस्पतालों में जांच रिपोर्ट मिलने में कई दिन लग रहे है। लखनऊ में रोजाना 17 हजार जांच किट चाहिए, लेकिन मात्र 10 हजार किट ही उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि सीएमओ दफ्तर में फोन करने पर अक्सर फोन नहीं उठता है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री से इसकी शिकायत के बाद सीएमओ फोन तो उठाते हैं, लेकिन सकारात्मक कार्य नहीं होता है।