शुभांशु का शुभ आगमन देख मां की आंखों में उमड़े खुशी के आंसू
लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से शुभांशु शुक्ला की वापसी एवं स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन यान की लैंडिंग का सीधा प्रसारण मंगलवार को सिटी मांटेसरी स्कूल कानपुर रोड शाखा के प्रेक्षागृह में हुआ। जैसे ही शुभांशु का यान प्रशांत महासागर के कैलिफोर्निया तट क्षेत्र में उतरा, प्रेक्षागृह में मौजूद उनकी मां आशा शुक्ला की आंखों से खुशी के आंसू सैलाब बनकर बह निकले। भावुक होकर उन्होंने अपना सिर शुभांशु के पिता शंभू दयाल शुक्ला के कंधे पर टिका दिया। हाथ जोड़कर ईश्वर को धन्यवाद देने लगीं।
प्रेक्षागृह में मौजूद शुभांशु के परिजनों के अलावा स्कूल के विद्यार्थी और शिक्षक भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। यान के सफल लैंडिंग की घोषणा के साथ प्रेक्षागृह भारत माता की जयघोष से गुंजायमान हो गया। स्क्रीन पर शुभांशु का चेहरा आने पर मां आशा शुक्ला डबडबाई आंखों से अपलक उन्हें निहारती रहीं। उन्होंने कहा कि मन कर रहा है कि बेटा सामने हो और मैं अभी उसे गले से लगा लूं।
मां आशा शुक्ला ने इतने बड़े मिशन पर बेटे को भेजने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। बताया कि बेटे के 18 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने का समय उनके लिए सबसे मुश्किल भरा था। अब पूरा परिवार शुभांशु की राह तक रहा है। मेरी कामना है कि भारत का हर बेटा शुभांशु जैसा बने और देश का नाम रोशन करे।
पिता शंभू दयाल ने बताया कि शुभांशु ने सोमवार को अंतरिक्ष स्टेशन से लाैटने से पहले हमसे बातचीत की। कहा कि ये मेरी अंतरिक्ष स्टेशन से अंतिम कॉल है। लौट रहा हूं... जल्द मिलूंगा। पिता ने कहा कि मंगलवार के दिन ही अंतरिक्ष के लिए उसने उड़ान भरी थी और आज मंगलवार के दिन वापसी की है। इसमें बजरंगबली की बहुत कृपा है। मंगलवार को हमने सुबह घर में सुंदरकांड का पाठ किया और प्रभु से प्रार्थना की। हम सब उसके घर पर स्वागत के लिए उत्सुक हैं।
बहन शुचि मिश्रा ने बताया कि जब अंतरिक्ष स्टेशन से उसकी आखिरी कॉल आई तब हम सभी बड़े भावुक थे। वो जानता था कि मां रो रही हैं, लेकिन फिर भी शांत रहा और हमें ढाढ़स बंधाता रहा। इससे पहले हर कॉल में हम हंसते थे। सवाल पूछते थे लेकिन, इस बार जैसे सभी ने चुप रहने का मन बना लिया था। मां कुछ बोल ही नहीं पाईं। सिर्फ उसकी आवाज सुनकर रोती रहीं।
शुभांशु की भांजी वामिका मिश्रा ने बताया कि मामा जब भी छुट्टियों में घर आते हैं तो वह हम सभी के साथ पढ़ाई की क्लास लगाते हैं। मैं 11वीं की छात्रा हूं। पहले इंजीनियर बनना चाहती थी लेकिन, मामा को देखकर अब एस्ट्रोनॉट बनना चाहती हूं।