रही-सही कसर पूरी कर दी राष्ट्रपति चुनाव ने। ओम प्रकाश राजभर भाजपा के पाले में दिखे। बसपा भी समर्थन में दिखी। सपा के टिकट पर जीते शिवपाल सहित कुछ अन्य वोटों के भी छिटकने के संकेत सामने आए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को यूपी में अपेक्षा से ज्यादा मिले वोटों ने विपक्ष की साख को चोट पहुंचाई तो मुख्यमंत्री के रणनीतिक कौशल को साबित किया।
लोकसभा की दो सीटों के उपचुनाव सिर्फ अखिलेश या सपा को ही धक्का देने वाले नहीं थे बल्कि जेल से जमानत पर बाहर आए आजम खां को भी करारा झटका देने वाले रहे। रामपुर में भाजपा की जीत ने यह जता दिया कि योगी सरकार के कार्यों ने प्रदेश की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली सीट आजम के गढ़ रामपुर में भी लोगों में भाजपा का भरोसा बढ़ाया है। मुस्लिमों का भी आजम पर अब पहले जैसा भरोसा नहीं बचा है। विधान परिषद के एवं राज्यसभा के चुनाव में भाजपा की सफलता ने भी योगी को मजबूत किया ।
चुनौतियां से पाया पार
ऐसा नहीं है कि सीएम योगी, उनकी सरकार या सत्तारूढ़ दल भाजपा के लिए इन छह महीनों में सब अच्छा ही अच्छा रहा। नौकरशाही के रवैये एवं पुलिस की कार्यप्रणाली को योगी सरकार के पहले कार्यकाल में भी सवाल उठे थे। इस बार भी उठे। पिछली बार विधायकों में ही असंतोष सार्वजनिक हुआ था। इस बार मंत्रियों का असंतोष सामने आया। तबादलों को लेकर सरकार की अंतर्क लह सुनाई दी। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का अपने ही विभाग के अपर मुख्य सचिव से सार्वजनिक हुए मतभेदों ने सरकार की साख पर सवाल भी उठाए।
जलशक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक के पत्र और इस्तीफे की चर्चा ने भी सरकार के मुश्किलें खड़ी कीं और रक्षात्मक रुख अपनाने को मजबूर किया। पर, मुख्य विपक्षी दल सपा किसी को मुद्दा नहीं बना पाई। विपक्ष को सरकार और सत्तारूढ़ दल भाजपा को घेरने का मौका उस समय भी था जब एक दिन अचानक विधान परिषद में नेता सदन पद पर स्वतंत्रदेव सिंह के स्थान पर केशव प्रसाद मौर्य की नियुक्ति कर दी गई। पर, इस बार भी सपा कुछ खास नहीं कर पाई। उल्टे विधान परिषद से कांग्रेस की पूरी तरह विदाई तथा नेता प्रतिपक्ष पद की शर्ते पूरी करने में सपा की विफलता ने भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त दे दी।
योगी सरकार 2.0 में जिस तरह विकास कार्यों में तेजी का संदेश दिया जा रहा है। सरकार बनने के तुरंत बाद तीसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिए 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता तैयार किया गया। अर्थशास्त्री प्रो. एपी तिवारी कहते हैं कि प्रदेश के इतिहास का अब तक सबसे बड़ा बजट पारित कराकर, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन, किसानों को बीज आदि की सहायता भाजपा के संकल्प पत्र के 97 वादों को पूरा करने के लिए 54,833 रुपये के प्रावधान भाजपा के लोककल्याण एजेंडे पर काम करने के दावे को पुष्ट करते हैं।
राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 8.3 प्रतिशत के विपरीत प्रदेश में बेरोजगारी की दर को 3.9 प्रतिशत पर थामे रहना भी योगी सरकार की सफलता है। सूखा एवं बाढ़ को लेकर मुख्यमंत्री की सक्रियता तथा बकाया बिजली बिलों एवं अन्य राजस्व देयों की वसूली पर रोक ने सरकार के कल्याणकारी छवि के दावे को ज्यादा मजबूती दी है। हालांकि बरसात के चलते बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के एक-दो स्थानों पर टूटने तथा गर्मी के दौरान कोयले की किल्लत से बिजली को लेकर कुछ दिन के लिए ही सही आई समस्या ने सरकार की रीतिनीति को लेकर कुछ सवाल भी उठाए। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर भी सवालिया निशान लगा लेकिन मुख्यमंत्री ने कठोर तेवरों से इनको व्यापक नहीं होने दिया।
बदलाव की उम्मीदों को उड़ान
वक्फ संपत्तियों की जांच एवं मदरसों के सर्वेक्षण के फैसलों के साथ अगर देशव्यापी पड़ रहे पीएफआई पर छापों को देखें, साथ ही इन कार्यों के तार उपद्रवियों पर शिकंजा कसने के लिए विधानसभा में पारित कराए गए विधेयक से जोड़ें, जिसमें किसी धरना-प्रदर्शन या उपद्रव के दौरान उपद्रवियों द्वारा सार्वजनिक संपत्तियों को पहुंचाए गए नुकसान की वसूली के प्रावधानों को और कठोर किया गया है तो सरकार से उम्मीदों को नई उड़ान मिलती दिख रही है।
वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र भट्ट कहते हैं कि उपद्रव के दौरान किसी निर्दोष की मौत पर दंगाइयों से वसूली कर उसके परिवार को 5 लाख रुपये देने, दिव्यांग होने वालों को 1 लाख रुपये देने का प्रावधान तथा सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए पहले से ज्यादा कड़े किए गए प्रावधान तुष्टीकरण एवं वोट बैंक की राजनीति में बदलाव का संदेश दे रहे हैं। साथ ही सरकार ने जिस तरह 1989 के उस आदेश को रद्द करने का फैसला किया है जिसमें प्रदेश की ऊसर, बंजर, भीटा आदि भूमि पर बने कब्रिस्तान, ईदगाह एवं मस्जिद के नाम ही दर्ज करने का आदेश दिया गया था, उससे भी सरकार के एजेंडे पर और वोट देने वालों की अपेक्षाओं पर दृढ़ता से काम करने का संकेत निकल रहा है।
इसी के साथ जिस तरह विधानसभा सदन का एक दिन पूरी तरह महिला जनप्रतिनिधियों को समर्पित करते हुए पॉक्सो एक्ट व महिला यौन उत्पीड़न के मामलों में कानून को सख्त बनाने का फैसला किया है। उससे सरकार सभी को उनके सरोकारों के साथ साधते हुए ही नहीं दिख रही है बल्कि लोगों को नई उम्मीदें भी बंधाती नजर आ रही है।