कहीं हुंकार...। कहीं ललकार...। कुछ पुचकार...। कुछ वादे...। कुछ इरादे...। ये अच्छा...। वो बुरा...। इनकी जय...। उनकी जय...। इन सबसे होते हुए लीजिए चुनावी यात्रा अब दूसरे पड़ाव पर आ पहुंची। सोमवार को 9 जिलों की 55 सीटों पर इम्तिहान है। 586 खिलाड़ी मैदान में हैं। इन पिचों पर सिर्फ सियासी खिलाड़ियों का ही इम्तिहान नहीं है, हमारा-आपका भी है। ये परीक्षा है हमारे विवेक की। ये परीक्षा है हमारी पारखी नजरों की। ये परीक्षा है बेहतर का चुनाव करने की। नितिन यादव और अमित मुद्गल बता रहे हैं कैसी है इन 9 जिलों की चुनावी पिच। यह भी जानिए कि कहां गेंद उछाल लेगी, कहां गुगली बैट्समैन का इम्तिहान लेने को तैयार है। सबसे पहले बात चुनावी पिच की। जिन 9 जिलों में 14 फरवरी को मतदान होगा वे पश्चिमी यूपी से लेकर रुहेलखंड तक फैले हैं। रुहेलखंड के जिले भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों से सटे हैं, जहां पहले चरण का चुनाव संपन्न हुआ है। ऐसे में पहले चरण के मतदान का दूसरे चरण पर भी साफ असर दिखेगा। बहरहाल, सियासी पंडितों का मानना है कि ज्यादातर सीटों पर मुकाबला कड़ा होगा।
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चुनावी पिच भगवा खेमे के रणकौशल की लेगी परीक्षा
इस बार की चुनावी पिच ऐसी है जो भगवा खेमे के रणकौशल का इम्तिहान लेगी। गंगा खादर क्षेत्र से जुडे़ जिलाें में किसानों के मुद्दे हैं, तो बरेली के आसपास के जिलों में लखीमपुर खीरी प्रकरण का प्रभाव डालने की कवायदें भी खूब हुई हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में भाजपा ने भी अपनी तैयारियोें में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 38 सीटों के आंकड़े को और ऊपर ले जाने की उसने पूरी कवायद की है।
आजम फैक्टर कितना प्रभावी
समीकरणों की बिसात पर अति पिछड़ों की अहम भूमिका
दूसरे चरण की सीटों पर सैनी, कुर्मी, मौर्य, लोधी, भुइयार वोटों की अच्छी खासी संख्या है। इनके अलावा ब्राह्मण, वैश्य, त्यागी, ठाकुर, गुर्जर का समीकरण बनाकर भाजपा चुनावी वैतरणी पार करने के प्रयास में हैं। दलित मतदाताओं की काफी संख्या होने के कारण बसपा का लक्ष्य सीधा है। वह दलितों के साथ अन्य जातियों को जोड़कर सोशल इंजीनियरिंग के सहारे चुनावी रण जीतना चाहती है। गठबंधन का फोकस, जाट, मुस्लिम व अन्य पर है, तो कांग्रेस पारंपरिक वोटों के सहारे चुनावी मैदान में है।
सबसे मालदार प्रत्याशी
- 296 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के साथ सबसे मालदार प्रत्याशी हैं रामपुर से कांग्रेस प्रत्याशी नवाब काजिम अली खान।
- 157 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं बरेली कैंट से सपा प्रत्याशी सुप्रिया एेरन।
- 140 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के साथ तीसरे नंबर पर हैं अमरोहा के नौगांवा सादात से भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र नागपाल।
- 6700 रुपये की ही चल संपत्ति है शाहजहांपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी संजय कुमार के पास।
- 113 प्रत्याशी ऐसे हैं जिनपर दर्ज हैं गंभीर किस्म के आपराधिक मामले। (तथ्य एडीआर रिपोर्ट के अनुसार)
15 सीटों पर मुस्लिम मतदाता अहम
सीट मतदाता
बेहट 55 प्रतिशत
सहारनपुर देहात 53 प्रतिशत
कुंदरकी 55 प्रतिशत
मुरादाबाद देहात 58 प्रतिशत
धामपुर 55 प्रतिशत
नकुड़ 40 प्रतिशत
देवबंद 45 प्रतिशत
कांठ 45 प्रतिशत
ठाकुरद्वारा 40 प्रतिशत
बिजनौर सदर 41 प्रतिशत
चांदपुर 40 प्रतिशत
नूरपूर 38 प्रतिशत
बड़ापुर 39 प्रतिशत
नहटौर 45 प्रतिशत
नगीना 45 प्रतिशत
रुहेलखंड : हर बात पर मतदाताओं की नजर
रुहेलखंड के तीन जिलों में मतदान होने से पहले मतदाता मानो हर बात पर निगाह लगाए हुए है। उनके पास पहले चरण के सारे समीकरण हंै, तो वे स्थानीय गणित भी लगा रहे हैं। आप ऐसे में क्या अंदाजा लगाएंगे, जब भोजीपुरा विधानसभा के एक वोटर का कहना हो कि वह जिस उम्मीदवार को वोट करेगा, उसके हारने की स्थिति है। फिर वोट क्यों? तो जवाब आया कि हम पार्टी के वोटर हैं। अलग-अलग जगह पर मतदाताओं के अलग-अलग मिजाज के बीच सोमवार को कई दिग्गजों का भी इम्तिहान होना है। पिछले चुनाव में बरेली और आसपास के चुनावों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया था, तो इस बार सपा, बसपा और कांग्रेस अलग-अलग सीटों पर अलग-अलग चुनौती पेश कर रहे हैं। सभी दलों के अपने दावों के बीच जनता का फैसला सोमवार को ईवीएम में बंद हो जाएगा।
बरेली : दिग्गजों का इम्तिहान
नौ सीटें जीतकर पिछली बार भाजपा ने इस जिले में शानदार प्रदर्शन किया था। इसके बाद भाजपा की सरकार बनी तो कैंट विधायक राजेश अग्रवाल को वित्तमंत्री बनाया गया और आंवला से विधायक धर्मपाल सिंह सिंचाई मंत्री बनाए गए। अब पांच साल बाद स्थिति कुछ अलग है। लगभग तीन साल पहले मंत्री पद से हटाए गए राजेश अग्रवाल की जगह संजीव अग्रवाल कैंट से दावेदार हैं, तो धर्मपाल सिंह आंवला से भाजपा से मैदान में तो हैं, लेकिन उन्हें भी मंत्री पद से हटा दिया गया था। करीब छह माह पहले बहेड़ी विधायक और फिर से चुनाव लड़ रहे छत्रपाल गंगवार को राजस्व राज्यमंत्री बनाया गया था। नवाबगंज के विधायक केसर सिंह गंगवार की कोरोना से मौत के बाद उनकी जगह इस बार डॉ. एमपी आर्य गंगवार भाजपा से मैदान में हैं। एक और विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल का टिकट भी काटा जा चुका है। सपा ने इस बार बरेली कैंट सीट पर पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन की पत्नी पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन को उतारकर सीट को वीआईपी बनाने के साथ ही मुकाबले को रोचक बना दिया है। पांच बार के विधायक पूर्व मंत्री और सपा से प्रत्याशी भगवत शरण गंगवार नवाबगंज से किस्मत आजमा रहे हैं। कुर्मी और मुस्लिम बहुल कई विधानसभा सीटों पर इस बार जोरदार मुकाबला होने की संभावना है।
शाहजहांपुर : भाजपा के सामने सीटें बचाए रखने की चुनौती
शाहजहांपुर में छह सीटें नगर, ददरौल, जलालाबाद, तिलहर, कटरा और पुवायां (सु.) हैं। इनमें पांच सीटों पर भाजपा विधायक हैं जबकि जलालाबाद से सपा से शरदवीर सिंह जीते थे। भाजपा के तिलहर से विधायक रोशनलाल वर्मा अब सपा में हैं। वह तिलहर से सपा से चुनाव लड़ रहे हैं। तिलहर से सपा से टिकट मांग रहीं सलोना कुशवाहा को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है। पूर्व विधायक नीरज मौर्य भाजपा से सपा में आ गए और जलालाबाद से प्रत्याशी हैं। टिकट कटने से नाराज सपा विधायक शरदवीर सिंह भाजपा में आ गए। हालांकि, उन्हें टिकट नहीं मिला। नगर विधानसभा सीट से वित्त, चिकित्सा शिक्षा और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना भाजपा प्रत्याशी हैं। वे 8 बार विधायक रह चुके हैं।