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ISIS के निशाने पर था विधान भवन व चारबाग स्टेशन

Mon, 25 Jan 2016 02:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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यूपी विधानभवन और राजधानी का चारबाग रेलवे स्टेशन इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के निशाने पर था। राजधानी के इंदिरानगर से गिरफ्तार मो. अलीम ने अपने साथियों के साथ विधानसभा की रेकी भी की थी। वहां जाने और निकलने वाले सभी रास्तों का अध्ययन किया था।
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चारबाग रेलवे स्टेशन की भी इसी तरह रेकी की गई थी। यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है एनआईए की अलीम से पूछताछ में। यह जानकारी मिलने के फौरन बाद ही विधान सभा के इर्द-गिर्द सुरक्षा बढ़ाने का फैसला हुआ।

आईजी सतीश गणेश समेत कुछ अन्य अफसरों ने रविवार को सुरक्षा इंतजाम का जायजा भी लिया। एनआईए के सूत्रों के अनुसार, पूर्व में पकड़े गए आईएस के संदिग्ध आतंकी इकलाख ने भी इसी तरह की जानकारी दी थी।
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शुरुआत में इन सदस्यों ने हरिद्वार के अर्द्ध कुंभ और इलाहाबाद के माघ मेला को भी निशाने पर रखा गया था। पर तैयारी पूरी न होने पर वारदात को अंजाम नहीं दिया जा सका था।

सरकार से मिले लैपटॉप का आतंक के लिए इस्तेमाल

अलीम आतंकी गतिविधियों के लिए जिस लैपटाप का इस्तेमाल कर रहा था, वह उसे यूपी सरकार की ओर से मार्च 2013 में मिला था। इसी लैपटाप से सोशल साइट्स के जरिए वह अपने साथियों के संपर्क में था। अलीम के लैपटॉप को लेकर जांच एजेंसी पसोपेश में हैं।

पूछताछ में अलीम ने बताया था कि उसके पास जो लैपटॉप था उसने अपने दोस्त चांद बाबू के जरिए बेच दिया। चांद बाबू की ट्रांस गोमती इलाके में लैपटॉप आदि की वर्कशाप है। चांद बाबू को हिरासत में लेकर पूछताछ हुई तो अलीम के बयान की पुष्टि नहीं हुई।

ऐसे में यूपी एटीएस ने दिल्ली एटीएस के अफसरों से संपर्क कर उनसे अलीम से लैपटॉप के बारे में पूछताछ करने को कहा है। एटीएस को उम्मीद है कि लैपटॉप बरामदगी होने के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
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नए सदस्य बनाने में जुटा था अलीम

एटीएस अलीम और कुशीनगर से गिरफ्तार रिजवान के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल व ई-मेल खातों की पड़ताल कर यह जानने की कोशिश में लगी है कि उसके किन-किन लोगों से संपर्क थे।

जानकारी मिली है कि दोनों आईएस के लिए नए सदस्यों की भर्ती की मुहिम में जुटे थे। फिलहाल यह जानकारी नहीं मिल सकी है कि अभी तक कितने लोगों को जोड़ा गया है।

एटीएस के अफसरों का कहना है कि नए युवकों को चिह्नित कर अलीम व रिजवान इसकी जानकारी अपने हैंडलरों को देते थे। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इन्हें आईएस से जोड़ने की पहल होती। दोनों के हैंडलर बंगलूरू के हैं।
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