प्रदेश में दूसरे अनुदेशक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए स्थान चयन को लेकर आ रही अड़चन को दूर हो गई है। सरकार ने प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना सुल्तानपुर में करने का फैसला किया है। इससे संबंधित आदेश भी अगले सप्ताह तक जारी कर दिया जाएगा।
अपने-अपने क्षेत्र में स्थान चयन को लेकर सियासी दावपेंच के चलते यह मामला काफी दिनों से लटका हुआ था। स्थान को लेकर आ रही अड़चन दूर होने के बाद व्यावसायिक शिक्षा विभाग ने प्रशिक्षण संस्थान को खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दिया है।
प्रदेश में हर साल करीब दो लाख युवक आईटीआई में प्रशिक्षण लेते हैं। प्रदेश में 1800 से अधिक निजी क्षेत्र के और 261 राज्य सरकार के आईटीआई हैं। अगले साल तक राज्य के आईटीआई कॉलेजों की संख्या बढ़कर 300 के करीब हो जाएगी। जबकि इन संस्थाओं से पढ़ाई करके निकलने वाले युवकों को अनुदेशक की ट्रेनिंग देने के लिए सिर्फ लखनऊ में ही ट्रेनिंग सेंटर है।
ऐसे में युवकों को अनुदेशक की ट्रेनिंग के लिए प्रदेश के बाहर भेजना पड़ता है। इससे निजात पाने के लिए व्यावसायिक विभाग ने करीब छह महीने पहले ही प्रदेश में एक और प्रशिक्षण संस्थान खोलने का प्रस्ताव तैयार किया था।
इसकी जानकारी होने पर नेता अपने सियासी प्रभाव के बल पर संस्थान की स्थापना अपने-अपने क्षेत्र में कराने का प्रयास कर रहे थे। स्थिति को देखते हुए विभाग ने प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
काफी मंथन करने के बाद अब यह तय किया था कि लखनऊ, इलाहाबाद व कानपुर को छोड़कर इस संस्थान की स्थापना अब उसी जिले में की जाएगी, जहां पर पहले से स्थापित आईटीआई परिसर में संस्थान की जरूरत के मुताबिक खाली जमीन या बिल्डिंग उपलब्ध होगी।
इस मानक के मुताबिक सुल्तानपुर स्थित आईटीआई परिसर को सबसे उपयुक्त स्थान माना गया है। इसलिए संस्थान की स्थापना अब सुल्तानपुर में करने का फैसला किया गया है।
पूर्वांचल के जिलों को मिलेगा विशेष फायदा
प्रदेश में स्थिति सरकारी और निजी क्षेत्र के आईटीआई से प्रशिक्षत होकर निलकने वाले युवकों को अब सुल्तानपुर में ही अनुदेशक की ट्रेनिंग मिल सकेगी। खासकर पूर्वांचल के करीब 25 जिलों के युवकों को अनुदेशक की ट्रेनिंग लेने के लिए लखनऊ या दूसरे प्रदेश में जाने से मुक्ति मिलेगी।