लखनऊ। प्रदेश के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाड़ियों की लंबी फौज तैयार करने वाले लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में पुरानी वाली बात नहीं रही। एक समय यहां एडिमीशन के लिए लंबी कतार लगती थी, लेकिन आज पूरी सीटें भी नहीं भर पाती हैं। वर्तमान में यहां क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, एथलेटिक्स और फुटबाॅल में अधिकतम 315 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था है, लेकिन पिछले सत्र में यह संख्या 280 तक ही पहुंच पाई। कॉलेज में प्रशिक्षण व्यवस्था के स्तर में भी इजाफा नहीं हुआ।
बैडमिंटन
वर्ष 2025 में कॉलेज प्रांगण में बैडमिंटन हॉल का निर्माण भी शुरू हुआ था, जो एक साल बीत जाने के बाद भी अधूरा है। हालांकि देखकर तो लगता है कि अभी तक हॉल में काम ही नहीं शुरू हुआ। शटलरों का अभ्यास बाधित होते देख प्रबंधन की ओर से ट्रेनिंग की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। खिलाड़ियों को काॅलेज बस से 20 किमी दूर विनय खंड मिनी स्टेडियम में ट्रेनिंग करने भेजा जाता है ताकि कम से कम एक समय अभ्यास हो सके। हालांकि ट्रेनिंग सप्ताह में दो या तीन दिन ही हो पाती है। लिहाजा बेहतर परिणाम की उम्मीद बेमानी होगी।
एथलेटिक्स
कॉलेज प्रांगण में वर्षों पहले 400 मीटर का सिंथेटिक रनिंग ट्रैक बनाया गया था, जो जगह-जगह से खराब हो चुका है। खासतौर पर ट्रिपल जंप वाला रनवे तो दौड़ने लायक नहीं रह गया है। ट्रैक के बीच में हैमर थ्रो केज भी काफी समय से गायब है। वर्ष 2016 में यहां हुए जूनियर हॉकी वर्ल्डकप के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हेलिकाॅप्टर को उतारने के लिए हैमर थ्रो केज के पोल उखाड़कर हेलीपैड बना दिया गया था। तब से पोल को लगाया ही नहीं गया।
क्रिकेट
सुरेश रैना और आरपी सिंह के बाद स्पोर्ट्स कॉलेज से कई क्रिकेटरों ने यूपी के लिए खेलकर अपनी पहचान बनाई लेकिन यहां उच्च स्तरीय सुविधाओं का हमेशा अभाव रहा। अभ्यास के लिए सीमेंट और टर्फ विकेट तो बन गए, लेकिन इंडोर ट्रेनिंग सेंटर व बॉलिंग मशीन जैसी सुविधाओं के लिए आज भी खिलाड़ी तरस रहे हैं।
वॉलीबॉल
मिट्टी के वॉलीबॉल कोर्ट से बेहतर परिणाम देना आसान नहीं है लेकिन स्पोर्ट्स कॉलेज के प्रशिक्षुओं ने इस मिथ को तोड़ने में सफलता हासिल की। इसके बावजूद कॉलेज प्रबंधन ने कभी इन वॉलीबॉल कोर्ट को सिंथेटिक बनाने की कोशिश नहीं की थी, इंडोर कोर्ट बनाना तो दूर की बात है।
काॅलेज में खेलों की सुविधाओं में इजाफा करने की कोशिश लगातार की जा रही है, ताकि खिलाड़ियों को खेल का बेहतर माहाैल मिले। जहां कमियां हैं, उसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा। - डाॅ. अतुल सिन्हा (कार्यवाहक प्रिंसिपल, लखनऊ स्पोर्ट्स काॅलेज)