फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गठबंधन के 23 दिन बाद सीटों का बंटवारा न होने से असमंजस की स्थिति, प्रियंका वाड्रा बनी वजह!

Mon, 04 Feb 2019 01:01 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
अखिलेश यादव, मायावती व प्रियंका गांधी वाड्रा। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव को लेकर सपा-बसपा गठबंधन के 23 दिन बाद भी दोनों में अब तक सीटों का बंटवारा नहीं हो सका है। इससे दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बताया जाता है कि दोनों दलों में कई सीटों को लेकर पेंच फंसा हुआ है।

विज्ञापन


मायावती और अखिलेश यादव ने 12 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन का एलान किया था। इसके तहत दोनों दलों को 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ना है। दो सीट कांग्रेस व दो राष्ट्रीय लोकदल के लिए छोड़ी गई हैं। तब मायावती ने कहा था कि सीटों का बंटवारा हो गया है, इसकी सूचना मीडिया को भिजवा दी जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि 60 से ज्यादा सीटों पर दोनों दलों के बीच सहमति बन गई है। लगभग एक दर्जन सीटें ऐसी हैं जिन पर दोनों ही अपने-अपने तर्कों के साथ अपना दावा जता रहे हैं।

विज्ञापन

इन सीटों पर फंसा पेंच

बसपा ने पश्चिमी यूपी में कई ऐसी सीटों पर दावा जताया है, जिन पर 2014 में सपा दूसरे नंबर पर थी। इनमें नगीना (सुरक्षित) सीट भी शामिल हैं जहां से मायावती के चुनाव लड़ने के कयास हैं। इसी तरह बिजनौर सीट भी बसपा चाहती है। मध्य यूपी की कुछ सीटों के साथ ही पूर्वांचल की आधा दर्जन सीटों पर भी दोनों दावे ठोक रहे हैं।

रालोद की भूमिका भी साफ नहीं

गठबंधन में अभी रालोद की भूमिका साफ नहीं है। हालांकि, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कह चुके हैं कि रालोद कितनी सीटों पर लड़ेगा, इसे लेकर कन्फ्यूजन नहीं है। चर्चा है कि रालोद को बागपत, मुजफ्फरनगर व मथुरा सीट दी जा रही हैं। वहीं, रालोद एक और सीट चाहता है।
विज्ञापन

देरी की वजह प्रियंका फैक्टर तो नहीं

सियासी हल्कों में चर्चा है कि सीटों के बंटवारे में देरी के पीछे कहीं प्रियंका वाड्रा का सक्रिय राजनीति में आना तो नहीं है? फिलहाल प्रियंका इफेक्ट के आकलन के बाद उपजे हालात में कुछ सीटों में फेरबदल भी हो सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें