बांग्लादेश के रास्ते यूपी में अवैध रूप से पहुंचे दो हजार से अधिक रोहिंग्या की तलाश शुरू हो गई है। अपर पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी स्टेट इंटेलीजेंस, एटीएस और जिलों की पुलिस को सौंपी गई है।
एटीएस रोहिंग्या के उस हवाला नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है, जिसके माध्यम से ये बांग्लादेश व म्यांमार में पैसे भेज रहे हैं।
उधर, आईजी एटीएस जीके गोस्वामी ने बताया कि संतकबीरनगर के खलीलाबाद से गिरफ्तार रोहिंग्या अजीजुल हक का पासपोर्ट बनाने वाले नरेश की तलाश में एटीएस ने गुजरात के अहमदाबाद में छापा मारा। पर आरोपी के गिरफ्तार होने की पुष्टि नहीं हो सकी है।
वहीं, सूत्रों का कहना है कि कि हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की जानकार रोहिंग्या अजीजुल ने ही एटीएस को दी थी। उसने पूछताछ में रोहिंग्या के संतकबीनगर, सिद्धार्थनगर, अलीगढ़ और मेरठ में रहने की बात भी बताई थी।
इस मामले में जांच से जुड़े एटीएस के अफसर बताते हैं कि अजीजुल ने कई रोहिंग्या से कमीशन लेकर उसे भारत लाने की बात कुबूली है। उसने यह भी बताया है कि उसका बहनोई नूर आलम भी इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
अजीजुल के पांच बैंक खातों में रकम जमा कराई गई है। इस जानकारी के बाद एटीएस रोहिंग्या के नेटवर्क के पीछे टेरर फंडिंग के तार जुड़े होने पर गौर कर रही है।