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Lucknow News: कबाड़ और लटकते तार...आग के मुहाने पर है जवाहर और इंदिरा भवन

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जवाहर भवन में जमा कबाड़।
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लखनऊ। दमकल विभाग की मशक्कत से भले ही बड़ा हादसा टल गया, लेकिन जवाहर और इंदिरा भवन में हर कदम पर आग का खतरा है। गैलरी और सीढि़यों के पास लगे टूटी-कुर्सी मेज व अन्य कबाड़, परिसर में मलबा और जगह-जगह खड़े कंडम वाहनों से दोनों भवन आग के मुहाने पर हैं। बचाव इंतजाम के नाम पर जवाहर भवन के कई तल पर टंगी बाल्टियों में रेत कम और कूड़ा-कचरा अधिक नजर आता है। कर्मचारी संगठनों की शिकायतों के बाद भी राज्य संपत्ति विभाग के अफसर बेपरवाह हैं।
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बाल्टियों में रेत कम, कूड़ा अधिक
जवाहर भवन के चौथे तल पर ही मलेरिया विभाग कार्यालय के रास्ते पर टंगी बाल्टियों में रेत कम दिखी। चाय के खाली गिलास और कूड़ा अधिक भरा था। सातवें तल पर भी यही नजारा दिखा। सबसे खराब स्थिति नौवें तल पर दिखी। संस्कृति निदेशालय के कार्यालय जाने वाले रास्ते में फायर सिलिंडर कबाड़ के पीछे टंगे दिखे। आपात स्थिति में इन सिलिंडर को चलाना तो दूर वहां से निकालने में भी मशक्कत करनी होगी।
सीढि़यों के पास कबाड़, कैसे बचेगी जान

जवाहर भवन के नौवें तल पर आग का सबसे अधिक खतरा है। यहां कार्यालयों के सामने छत की फाॅल्स सीलिंग जगह-जगह टूटी है। तारों के झुंड नीचे लटक रहे हैं। पूरी गैलरी में कुर्सी-मेज व अलमारी से रास्ता संकरा हो गया है। आपात स्थिति में नीचे उतरने की सीढि़यों के पास इतना कबाड़ लगा है कि लोगों को जान बचानी मुश्किल हो जाएगी। यही हाल इंदिरा भवन के नौवें तल का है। यहां भी आपातकालीन सीढि़यों के पास कबाड़ का ढेर दिखता है। अफरातफरी की स्थिति में लोग इस कबाड़ से टकरा ही सीढि़यों से नीचे गिर जाएंगे।
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कंडम वाहन और मलबा भी बढ़ा रहा खतरा
जवाहर और इंदिरा भवन के परिसर में कई स्थानों पर कंडम वाहन खड़े किए गए हैं। ये वाहन कई वर्षों से खड़े हैं। कर्मचारी संगठनों ने शिकायत भी की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। परिसर में कई स्थानों पर मलबा भी लगा है। इंदिरा भवन के परिसर में बने फायर कंट्रोल रूम में अंदर बरामदे व खुले स्थान पर कबाड़ लगा हुआ है।
शिकायतें कई, सुनवाई अब तक नहीं

जवाहर भवन- इंदिरा भवन कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष मीना सिंह ने बताया कि कबाड़ और कंडम वाहन हटाने के लिए राज्य संपत्ति विभाग के निदेशक को कई बार पत्र दिया गया। दोनों भवनों के मुख्य व्यवस्थाधिकारियों को भी अवगत कराया गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आग से बचाव के आधे-अधूरे इंतजामों को भी लेकर भी शिकायत की जा चुकी है।
जवाहर-इंदिरा भवन में रोजाना आते हैं इतने लोग
- 60 से अधिक कार्यालय संचालित हैं जवाहर और इंदिरा भवन में
- 10-10 तल हैं जवाहर व इंदिरा भवन में
- 7 हजार के करीब लोग आते हैं रोजाना (अधिकारी-कर्मचारी व फरियादी)
- 300 के करीब छोटे-बड़े वाहन खड़े होते हैं दोनों परिसर में
इन तलों पर आग का खतरा अधिक
- इंदिरा भवन के तीसरे, पांचवें और नौवें तल पर कबाड़ व अन्य अव्यवस्थाओं के चलते आग का खतरा अधिक है।
- जवाहर भवन के छठे, सातवें व नौवें तल पर भी आग की घटनाओं का खतरा है।

जवाहर भवन में जमा कबाड़।

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