छात्राओं को रोबोटिक्स के बारे में जानकारी देतीं प्रशिक्षक चांदनी जायसवाल
लखनऊ। अब सरकारी स्कूलों के बच्चे सिर्फ किताबों में रोबोट और ड्रोन की तस्वीरें नहीं देखेंगे, बल्कि खुद रोबोट बनाएंगे और ड्रोन उड़ाने की तकनीक भी सीखेंगे। नई शिक्षा नीति के तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग और आईटीआई संस्थानों के साथ एचसीएल फाउंडेशन व ग्रे सिम लर्निंग्स फाउंडेशन की पहल से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक का निशुल्क व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विद्यार्थी सेंसर और मोटर जोड़कर मशीन तैयार करने से लेकर डिजिटल डिजाइन को वास्तविक मॉडल में बदलने तक का हुनर सीख रहे हैं। थ्रीडी प्रिंटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) से भी परिचित कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को नई तकनीक से जोड़कर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षण विशेषज्ञ चांदनी जायसवाल ने बताया कि इस पहल से शहर के सरकारी विद्यालयों और आईटीआई संस्थानों को जोड़ा गया है। निर्धारित रोस्टर के अनुसार विशेषज्ञ विद्यालयों में पहुंचकर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
ड्रोन और रोबोट का विज्ञान समझ रहे विद्यार्थी
ड्रोन और रोबोट तकनीक भी प्रशिक्षण का प्रमुख हिस्सा है। विद्यार्थियों को ड्रोन और रोबोट की बनावट, संचालन की प्रक्रिया और विभिन्न क्षेत्रों में इसके उपयोग के बारे में बताया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों में नई तकनीक सीखने के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
थ्रीडी प्रिंटिंग का भी मिल रहा प्रशिक्षण
थ्रीडी प्रिंटिंग के प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को डिजिटल डिजाइन को वास्तविक मॉडल में बदलने की तकनीक सिखाई जा रही है। इससे विद्यार्थियों को डिजाइनिंग और आधुनिक निर्माण तकनीक की बुनियादी जानकारी मिल रही है।
Iनई शिक्षा नीति के तहत कक्षा दसवीं और बारहवीं के स्तर से ही विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में सरकारी विद्यालयों के बच्चों को आधुनिक तकनीक का ज्ञान निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।I
डॉ. दिनेश कुमार, मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी, लखनऊ मंडल