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नवरात्रि में करेंगे ये काम तो कभी बूढ़े नहीं होंगे आप

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यदि आप दीर्घायु रहने के ख्वाहिशमंद हैं तो नवरात्र का व्रत रखिए। यह दावा है वैज्ञानिकों का है। सीएसआईआर की वैज्ञानिक लैब सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) में उम्र बढ़ने से जुड़ी समस्याओं पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों ने पाया है कि व्रत रखने से खास प्रोटीन पैदा होता है।
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यह प्रोटीन दिमाग में न्यूरोन्स को सुरक्षित बनाता है। इससे बुढ़ापा रोकने में मदद मिलती है। सीडीआरआई की लैब में हुए रिसर्च ने व्रत से दीर्घायु और सेहतमंद होने की पौराणिक मान्यता को प्रमाणित किया है।

यह शोध सीडीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. आमिर नाजिर और उनकी टीम ने किया। यह टीम न्यूरोडीजनरेटिव डिसऑर्डर पर काम कर रही है। इस वजह से लोगों को अल्जाइमर और पर्किंसन जैसी बीमारियां होती हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि नया प्रोटीन अधिक मात्रा में होने पर इन बीमारियों को नियंत्रित कर रहा था।
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दिमाग नहीं होगा बूढ़ा ऐसे

डॉ. नाजिर ने बताया कि व्रत के समय खाने में कैलोरी की कटौती हो जाती है। शोध में हमें मिला कि कैलोरी कटौती होने पर ‘सरटुइन’ प्रोटीन की मात्रा बढ़ी। इस प्रोटीन ने दिमाग को न्यूरोप्रोटेक्शन देना शुरू कर दिया।
न्यूरोन्स की सुरक्षा होने पर हमारा दिमाग बूढ़ा होने से बचता है। इस प्रयोग को आगे मानव शरीर से जेनेटिक समानता वाले सी-एलीगेंट मॉडल (1 मिमी साइज का एक कीड़ा जिसपर माइक्रोस्कॉप के नीचे ही प्रयोग होता है) पर शोध किया गया।

नई शोध के परिणाम चौंकाने वाले थे। यहां भी न्यूरोप्रोटेक्शन मिला। सी-एलीगेंट की जिंदगी भी 21 दिन से बढ़कर 25 दिन हो गई। इससे तय हुआ कि अगर शरीर में कैलोरी कटौती की जाए तो बहुत हद तक इंसानी जिंदगी को भी फायदा मिलेगा।

पर इसका मतलब भूखा रहना नहीं

डॉ. नाजिर का कहना है कि कैलोरी कटौती का मतलब भूखा रहना नहीं है। इससे कुपोषण और दूसरी समस्याएं हो सकती हैं। एक आम व्यक्ति को औसतन 2300 कैलोरी चाहिए। अगर इसे 1500-2000 कर लिया जाए तो यह कैलोरी कटौती होगा। 1500 से नीचे जाने पर यह भूखा रहना हो जाएगा।

लैब में परिवार के अलग-अलग सदस्यों पर भी शोध किया गया। इनमें पाया गया कि कैलोरी कटौती का असर अलग-अलग तरीके से हुआ। मैकेनिज्म भले ही अलग था, पर हर मामले में न्यूरोप्रोटेक्शन मिला। इसे सरट्यूमिन 2.1,2.2,2.3 नाम दिया गया है।
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