लखनऊ। खेत में उगा कोई पौधा सिर्फ फसल नहीं, बल्कि रोजगार और उद्योग की नई राह भी बन सकता है। जरूरत है कि विज्ञान को प्रयोगशाला की चारदीवारी से निकालकर खेत, गांव और स्थानीय उद्यमों तक पहुंचाया जाए। इसी सोच के साथ केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। ये बातें पद्मश्री प्रो. अनिल कुमार गुप्ता ने कहीं। मौका था मंगलवार को संस्थान के 48वें वार्षिक दिवस समारोह का।
मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि जहां भी कोई पौधा उगे, वहां उसके विकास की पूरी संभावना होनी चाहिए। इसके लिए किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर नेटवर्क और क्लस्टर विकसित किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान से विकसित उत्पादों में वैज्ञानिकों के साथ किसानों, स्थानीय समुदायों और उस ज्ञान के मूल स्रोत को भी उचित मान्यता मिलनी चाहिए।
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के 85वें स्थापना वर्ष के मौके पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-सीसीएमबी हैदराबाद के उत्कृष्ट वैज्ञानिक डॉ. शंकरनारायणन राजन और विशिष्ट अतिथि महाराष्ट्र के राज्य मंत्री हेमंत पाटिल ने किया। उन्होंने कहा कि हल्दी की साझेदारी किसानों की आय मजबूत करेगी। डॉ. शंकरनारायणन राजन ने ‘पादप विकास से एक अप्रत्याशित संबंध’ विषय पर व्याख्यान दिया। सीमैप के निदेशक प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने अपने शोध को दूरदराज के किसानों तक पहुंचाया है। सीएसआईआर एरोमा मिशन को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार-विज्ञान टीम 2025 (कृषि) से सम्मानित किया गया। संस्थान को सतत कृषि में योगदान के लिए फिक्की सस्टेनेबल एग्रीकल्चर अवार्ड 2025 भी मिला है। फाइटो-फार्मास्युटिकल मिशन के तहत 14 संदर्भ सामग्री और छह नई किस्में जारी की गई हैं। संस्थान ने 16 हर्बल फॉर्मुलेशन प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण किया और छह पेटेंट दाखिल किए हैं।
हल्दी से कार्बन क्रेडिट तक साझेदारी
वार्षिक दिवस के दौरान कई संस्थानों के साथ समझौते भी हुए। बालासाहेब ठाकरे हरिद्रा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के साथ वासमत हल्दी को बढ़ावा देने, डीयूवीएएसयू, मथुरा के साथ औषधीय पौधों के पशु चिकित्सा उपयोग तथा गुजरात ग्रासरूट्स इनोवेशन ऑगमेंटेशन नेटवर्क के साथ पारंपरिक ज्ञान और सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने पर समझौता हुआ। कम्प्लायंस कार्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ कार्बन क्रेडिट कार्यक्रमों के लिए भी समझौता किया गया।
160 से अधिक किस्मों से बदल रही खेती की तस्वीर
सीएसआईआर-सीमैप ने औषधीय और सगंध पौधों के क्षेत्र में 160 से अधिक उन्नत किस्में विकसित की हैं। मेंथा (मेंटॉल मिंट), लेमनग्रास, पचौली और तुलसी की उच्च तेल व औषधीय युक्त प्रजातियों के जरिये किसानों की आय बढ़ाने, एरोमा मिशन को सफल बनाने और फाइटोफार्मास्युटिकल अनुसंधान में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। संस्थान ने ऐसी कृषि प्रौद्योगिकियां भी विकसित की हैं, जिनसे किसान कम उपजाऊ या बंजर भूमि पर सगंध पौधों की सफल खेती कर रहे हैं। एरोमा मिशन के तहत देशभर के हजारों किसानों को उन्नत तकनीक, डिस्टिलेशन यूनिट और ड्रोन तकनीक के प्रदर्शन के जरिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा देश के प्रमुख औषधीय पौधों की मेटाबोलिक प्रोफाइलिंग कर व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
सीमैप में आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता का व्याख्यान सुनते मौजूद लोग
सीमैप में आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता का व्याख्यान सुनते मौजूद लोग
सीमैप में आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता का व्याख्यान सुनते मौजूद लोग
सीमैप में आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता का व्याख्यान सुनते मौजूद लोग
सीमैप में आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता का व्याख्यान सुनते मौजूद लोग
सीमैप में आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता का व्याख्यान सुनते मौजूद लोग
सीमैप में आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता का व्याख्यान सुनते मौजूद लोग
सीमैप में आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता का व्याख्यान सुनते मौजूद लोग
सीमैप में आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता का व्याख्यान सुनते मौजूद लोग