प्रमाण पत्रों में गलती होने पर पल्ला नहीं झाड़ सकेंगे स्कूल
यूपी बोर्ड : संशोधन में नहीं चलेगी मनमानी, छात्रों को मिलेगी परेशानी से मुक्ति
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकपत्र और प्रमाण पत्रों की गलतियां सुधरवाने के लिए अब यूपी बोर्ड के छात्रों को भटकना नहीं पड़ेगा। स्कूल प्रशासन भी इससे पल्ला नहीं झाड़ सकेंगे। प्रमाण पत्रों में सुधार की जिम्मेदारी स्कूलों को ही लेनी होगी और छात्रों की पूरी मदद करनी होगी। इसको लेकर स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किया गया है।
अक्सर देखने में आया है कि छात्रों के माता-पिता व स्कूल के नाम, विषय आदि में त्रुटि हो जाती है। इनमें सुधार के लिए छात्रों को भटकना पड़ता है। सुधार प्रयागराज स्थित बोर्ड से किया जाता है। छात्रों को प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती और स्कूल प्रशासन इससे पल्ला झाड़ लेते हैं। इसको लेकर स्कूलों को ताकीद किया गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि स्कूलों को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी, छात्रों की हर संभव मदद करनी होगी। उन्होंने बताया कि यदि अंकपत्र और प्रमाण पत्र छात्रों को नहीं मिले हैं व उनके ब्योरे में किसी प्रकार की त्रुटि है तो स्कूलों को उसमें सुधार कर बोर्ड कार्यालय को मुहैया कराना होगा। ताकि समय रहते उसमें सुधार किया जा सके। सुधार के लिए वे सीधे छात्रों को नहीं सौंप सकते।
बोर्ड के अधिकारी और फोन नंबर की दें जानकारी
ऐसे छात्रों को बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों, फोन नंबर और प्रक्रिया की जानकारी स्कूल ही देगा। ताकि वे संशोधन के लिए आवेदन कर सकें। डीआईओएस ने बताया कि स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड पर अधिकारियों के नाम और बोर्ड कार्यालय का नंबर आदि चस्पा करना होगा।
स्कूल करते हैं त्रुटियां
छात्रों के ब्योरे में त्रुटियां स्कूलों द्वारा ही की जाती हैं। इन ब्योरों को छात्र, अभिभावक और शिक्षक से सत्यापित करना होता है, लेकिन स्कूल प्रशासन सत्यापन नहीं कराता। बोर्ड का मानना है कि नामावली की चेकलिस्ट को देखकर स्कूल प्रशासन जांच करने में रुचि नहीं लेते, जिस वजह से त्रुटियां पकड़ में नहीं आ पातीं और समय रहते सुधार नहीं हो पाता। जबकि बोर्ड इसमें ऑनलाइन संशोधन करने का एक मौका स्कूलों को देता है।