राज्य सरकार ने नौवीं और दसवीं के सभी विद्यार्थियों को एक समान दर से छात्रवृत्ति देने का फैसला किया है। इससे सामान्य, पिछड़े और अल्पसंख्यक छात्रों के वजीफे में तीन गुने से ज्यादा की बढ़ोतरी हो जाएगी। अब उन्हें भी अनुसूचित जाति के छात्रों की तरह साल में 2250 रुपये मिला करेंगे।
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सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए यह प्रस्ताव पास कर दिया गया, जबकि पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों के लिए भी यही व्यवस्था लागू करने की जानकारी समाज कल्याण मंत्री रामगोविंद चौधरी ने दी।
प्रदेश में अभी लागू व्यवस्था के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की दरें अलग-अलग हैं। अनुसूचित जाति के छात्रों को 150 रुपये महीने छात्रवृत्ति मिलती है, लेकिन भुगतान साल में 10 महीने का ही करने का प्रावधान है। इसके अलावा उन्हें किताबें आदि मद में 750 रुपये दिए जाते हैं।
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इस तरह उन्हें साल में 2250 रुपये का भुगतान किया जाता है। वहीं बाकी वर्र्गों के छात्रों को 60 रुपये महीने के हिसाब से साल में 720 रुपये दिए जाते हैं। सोमवार को कैबिनेट ने सामान्य वर्ग के छात्रों को भी साल में 2250 रुपये दिए जाने का प्रस्ताव पास कर दिया। इसके अलावा सामान्य वर्ग के लाभार्थियों के लिए सालाना आय सीमा भी बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई। अभी शहरी क्षेत्र में यह सालाना 56,460 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 46,080 रुपये थी।
एक समान आय सीमा के लिए लिया गया फैसला
पूर्व दशम कक्षाओं के लिए भी छात्रवृत्ति नियमावली
- फोटो : amar ujala
कैबिनेट की बैठक के बाद समाज कल्याण मंत्री रामगोविंद चौधरी ने संवाददाताओं को बताया कि सभी वर्गों के कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए एक समान छात्रवृत्ति और एक समान आय सीमा करने का फैसला ले लिया गया है।
छात्रवृत्ति में गड़बड़ी पर संस्थान होंगे ब्लैक लिस्ट
पूर्व दशम कक्षाओं के लिए भी छात्रवृत्ति नियमावली 2016 को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।
इन्हें उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति पूर्व दशम छात्रवृत्ति नियमावली 2016 और उत्तर प्रदेश सामान्य वर्ग पूर्व दशम छात्रवृत्ति नियमावली 2016 कहा जाएगा।
नियमावली में छात्रवृत्ति योजना लागू करने में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित संस्थान को काली सूची में डालने की व्यवस्था की गई है।
दोषी संस्थानों और छात्रों व अभिभावकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं।
मकान बनाना होगा और महंगा
सीमेंट पर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर बढ़ा
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प्रदेश सरकार ने सीमेंट पर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर बढ़ा दिया है। इससे घर बनाना और महंगा हो जाएगा। कर एवं निबंधन विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी। इससे सीमेंट केदाम में प्रति बैग 3 से 5 रुपये तक इजाफा हो सकता है।
अभी सीमेंट पर 12.5 फीसदी वैट के अलावा तीन फीसदी अतिरिक्त कर लिया जाता है। इस प्रकार सीमेंट व्यापारियों को कुल 15.5 प्रतिशत तक टैक्स देना पड़ता है। अब यह टैक्स 16.5 प्रतिशत हो जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब जल्द ही इस बारे में नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा।
फॉर्म 21 की बाध्यता खत्म
सरकार ने सीमेंट की लोकल बिक्री पर फॉर्म 21 को भरने की बाध्यता खत्म कर दी है। सीमेंट व्यापारियों की मांग के मद्देनजर कैबिनेट ने यह फैसला किया है।
बिल्डरों को बिल्डिंग मैटेरियल पर देना होगा वैट
कैबिनेट ने बिल्डरों को टैक्स के दायरे में लाने के लिए समाधान योजना लागू किए जाने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इसके तहत वाणिज्य कर विभाग अब बिल्डरों द्वारा खरीदे जाने वाले बिल्डिंग मैटेरियल पर वैट वसूल सकेगा।
प्रस्ताव के मुताबिक, मूल्य संवर्धित कर अधिनियम की धारा (6) केतहत बिल्डरों के लिए टैक्स का निर्धारण किया जाएगा, जो 2012-13 से लागू माना जाएगा।
गरीब बुजुर्गों को मिलेगी 400 रुपये महीना पेंशन
पेंशन
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राज्य सरकार ने होली के मौके पर बुजुर्गों को खास सौगातें दी हैं। सोमवार को कैबिनेट की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश राज्य वरिष्ठ नागरिक नीति’ पारित कर दी गई। इसमें गरीब बुजुर्गों की पेंशन एक अप्रैल से बढ़ाकर 400 रुपये करने समेत उनके लिए कई योजनाओं की घोषणा की गई है।
अभी तक उन्हें 300 रुपये पेंशन मिलती थी, जिसमें केंद्र का हिस्सा 200 रुपये और राज्य का हिस्सा 100 रुपये था। राज्य सरकार ने अपना भी हिस्सा बढ़ाकर 200 रुपये करने का निर्णय किया है।
इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण नियमावली-2014 के तहत स्थापित वृद्धाश्रमों के रख-रखाव और संचालन के लिए चयनित स्वयंसेवी संस्थाओं को अनुदान भी दिया जाएगा। ऐसे वृद्धाश्रमों में अशक्त एवं असहाय वरिष्ठ नागरिकों को आवास और भोजन आदि की व्यवस्था निशुल्क होगी।
नीति के तहत नवीन योजनाओं के मास्टर प्लान में एक ही परिसर में वृद्धाश्रम और अनाथालयों के निर्माण की व्यवस्था होगी। स्वैच्छिक संस्थाओं की ओर से वृद्धाश्रम और अनाथालय के निर्माण के प्रस्ताव मिलने पर उन्हें जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
राज्य सरकार खुद भी वृद्धाश्रमों और अनाथालयों के लिए भवन का निर्माण करवाकर स्वैच्छिक संस्थाओं को इन्हें चलाने के लिए देगी। ऐसे वृद्धाश्रमों में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें बीपीएल श्रेणी के बुजुर्गों के लिए आरक्षित होंगी और उनके भोजन की व्यवस्था मुफ्त होगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना को राज्य सरकार की हरी झंडी
40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करेगी
- फोटो : demo pic
‘प्रधानमंत्री आवास योजना-सबके लिए आवास (शहरी) मिशन’ को उप्र में शुरू करने करने संबंधी नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस मिशन पर आने वाले खर्च की 60 फीसदी राशि केंद्र और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करेगी।
केंद्र की इस योजना को राज्य के 635 शहरों में शुरू किया जाएगा। जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लोगों को ऋण पर मकान मुहैया कराया जाएगा। ऋण पर सरकार अनुदान भी देगी।
इसके अलावा योजना के तहत शहरों की मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए भी पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। योजना के दायरे में आने वाले सभी लाभार्थियों को 2022 तक आवास मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना के तहत शुरू होने वाली परियोजनाओं के अनुमोदन व निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। जबकि सूडा को नोडल एजेंसी नामित किया जाएगा।