सरकारी अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवाओं के लिए अलग लाइन लगने लगी है तो कुछ अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवा के लिए मेन स्टोर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
स्थिति ये है कि ओपीडी में दिखाने के बाद मरीज दवा के लिए दवा काउंटर पर घंटों लाइन में लगे रहते है। अगर डॉक्टर ने एंटीबायोटिक दवा लिख दी है तो उसको लेेने के लिए उनको दोबारा लाइन में लगकर दवा लेना पड़ता है।
वहीं, अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि दवा वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए यह कदम उठाया है। आलमबाग के सुनील रावत (38) का पेट की समस्या के बाद करीब एक महीने से सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है।
उन्होंने बताया कि मंगलवार को दवा काउंटर पर लाइन में लगे। दवा मिली और डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि एंटीबायोटिक दवा तो फॉर्मासिस्ट ने दी ही नहीं है।
इसके बाद डॉक्टर ने दोबारा पर्ची लिखकर मेन स्टोर भेजा तब जाकर उनको दवा मिल सकी। अस्पताल के दवा काउंटर पर दवा का वितरण पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
जिस भी मरीज को चिकित्सक एंटीबायोटिक दवा लिख रहे हैं उनको दवा के लिए मेन स्टोर पर लाइन लगानी पड़ रही है। यही हाल बलरामपुर, लोहिया और बाल महिला चिकित्सालयों का है।
वहीं, अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि दवा वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है।
सरकारी अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवा के संकट के चलते मेन स्टोर से दवा बांटी जा रही है, लेकिन दवा काउंटरों पर बैठे फॉर्मासिस्ट दवा की पर्ची अपने पास रखने के लिए मरीज को एंटीबायोटिक दवा के बारे में बताए बिना दूसरी दवाएं देने के बाद उनको वापस कर दे रहे है।
वहीं, अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि दवा एक काउंटर पर मिलनी चाहिए। मरीज पर्ची लेकर जब पहुंचता है तो उसे दवा मिल जाती है, लेकिन एंटीबायोटिक दवा देने में फॉर्मासिस्ट आनाकानी करते हैं।
मरीज शिकायत लेकर आते हैं तो उनको दूसरी पर्ची पर दवा का नाम लिखकर भेजना पड़ता है।