परमिट सेक्शन के कर्मचारी नवीनीकरण के जुर्माने की रकम मैनुअल काउंटर पर जमा कराते थे, जबकि इसकी फीस परमिट सेक्शन में ऑनलाइन कंप्यूटर में जमा होती थी। इससे जाहिर है कि रकम परमिट सेक्शन से लेकर काउंटर तक के कर्मचारियों के बीच बंट रही थी।
कमेटी कर रही गबन का सत्यापन
शासन ने ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद गबन के सत्यापन के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई। इसमें शामिल शासन के विशेष सचिव अरविंद कुमार पांडेय, परिवहन विभाग के वित्त नियंत्रक, राजेंद्र सिंह और डिप्टी कमिश्नर (यात्री कर) मुख लाल चौरसिया ने जांच शुरू कर दी है। हालांकि, बीमारी के चलते अरविंद कुमार पांडेय अभी जांच में शामिल नहीं हो सके हैं। संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) रामफेर द्विवेदी ने बताया कि अब तक के सत्यापन में 750 परमिट नवीनीकरण में 22,500 रुपये के जुर्माने की रकम को सरकारी खजाने में जमा न कराने का खुलासा हुआ है। इसमें जो परमिट लिपिक दोषी पाया गया, उसके खिलाफ मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई है। लिपिक सेवानिवृत्त हो चुका है।