यूपी में परिवहन निगम अधिकारियों की सरपरस्ती में सिंडीकेट ने वॉल्वो के ऑनलाइन टिकट बेचकर चार करोड़ रुपये से अधिक की रकम गबन कर ली।
टिकट बेचने वाली संस्था ने ये रकम परिवहन निगम के खाते में जमा ही नहीं की।
निगम ने जिन क्षेत्रीय अफसरों को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी थी, वो भी आंखें मूंदकर बैठे रहे।
जब मामले का खुलासा हुआ तो प्रबंधन ने गबन करने वाली संस्था व लापरवाहों पर कार्रवाई करने के बजाय गबन की गई रकम किस्त में वसूलने का रास्ता निकाल लिया।
हजम किए चार करोड़ रुपये
सूत्रों के अनुसार ऑनलाइन सीट बुक करने वाली संस्था से रोजाना राजस्व की रकम परिवहन निगम के खाते में जमा कराने की जिम्मेदारी एक क्षेत्रीय प्रबंधक को सौंपी गई थी। लेकिन इस क्षेत्रीय प्रबंधक के एक करीबी सेवानिवृत्त अधिकारी और उसके साथियों ने वॉल्वो की सीट बुकिंग के 4.38 करोड़ रुपये हजम कर लिए।
इनके खिलाफ कार्रवाई की फाइल चली तो वित्त इकाई में सेवानिवृत्त अधिकारी के जूनियर रहे अधिकारियों ने प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम तक को गुमराह करने की कोशिश की।
अधिकारियों ने संस्था व लापरवाहों पर पुलिस में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराने के लिए विधिक राय की पेशकश की।
अब किस्तों में चुका रहे रकम
सबसे आश्चर्य की बात तो यह रही कि निगम के वित्त नियंत्रक तक ने अब तक करोड़ों रुपये की वसूली के लिए कोई कदम नहीं उठाया। अब वित्त इकाई के अधिकारी संस्था व क्षेत्रीय प्रबंधक को बचाने के लिए आरोपियों से गबन की गई रकम किस्तों में जमा करा रहे हैं।
प्रधान प्रबंधक (संचालन) राजेश वर्मा ने बताया कि गबन की गई रकम में अब तक कितने रुपये जमा हुए इसका विवरण जांच के बाद ही पता लग सकेगा।