लखनऊ। तीन दिन पहले नगर आयुक्त गौरव कुमार की औचक जांच में सड़कों के निर्माण में बड़ा घपला सामने आया है। इन सड़कों की फाइलें पहले ही सभी स्तरों से पास होकर भुगतान के लिए लेखा विभाग में भेजी जा चुकी थीं। पहले भी पुराने कार्यों को फिर से दिखाकर भुगतान का खेल हो चुका है। नए नगर आयुक्त ने दोबारा जांच के आदेश दिए, मगर इंजीनियरों ने कार्यालय में बैठकर ही निर्माण को सही बताते हुए भुगतान पर मुहर लगा दी।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगर निगम ने लगभग 300 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए, जिनमें 250 करोड़ पार्षद और महापौर कोटे से और शेष 50 करोड़ सामान्य निधि से हुए। इन सभी कामों की जांच के बाद भुगतान के लिए फाइलें पूर्व नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह की ओर से 31 मार्च तक लेखा विभाग में भेजी जा चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, कई फाइलें गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं हैं। डबल भुगतान की आशंका को लेकर 31 मार्च तक करीब 400 फाइलों की जांच की मांग हुई थी, मगर दबाव पड़ने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल तो दिया गया, मगर भुगतान नहीं किया गया। नए नगर आयुक्त गौरव कुमार ने भी प्रमाण पत्र के बाद ही भुगतान किए जाने का आदेश जारी किया। जिसको लेकर अमर उजाला ने शनिवार 31 मई को खबर भी प्रमुखता से प्रकाशित की थी। जिसके बाद मंगलवार को नगर आयुक्त गौरव कुमार ने चार वार्डों में किए गए चार कार्यों की जांच की तो घपला सामने आया। कहीं पर सड़क की लंबाई कम मिली तो कहीं पर निर्माण सामग्री में धांधली मिली।
31 मार्च तक 4000 फाइलें लेखा विभाग में पहुंची थीं, जिनमें 2000 से अधिक फाइलों की दोबारा जांच बिना स्थल निरीक्षण के ही प्रमाणित कर दी गईं। इससे स्पष्ट है कि दोबारा जांच भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई।
घपलों की बड़ी वजह यह है कि पार्षद, महापौर और नगर आयुक्त कोटे के काम ई-टेंडर के बजाय मैनुअल होते हैं, जिससे चहेतों को ठेके मिलते हैं। अफसरों, जनप्रतिनिधियों और उनके करीबियों की मिलीभगत से जांच भी प्रभावित होती है।
भुगतान से पहले सभी जिम्मेदारों से निर्माण कार्य मानक के तहत हुआ है यह प्रमाण पत्र इसलिए मांगा गया है ताकि यदि कोई गड़बड़ी सामने आई तो संबंधित की जिम्मेदारी तय की जा सके। औचक जांच में जिन कार्यों में गड़बड़ी मिली है उनमें कटौती की जा रही है और जवाब-तलब भी किया जा रहा है। निर्माण कार्य सही से मानक के तहत हों उसको लेकर ही हर विभाग की अलग-अलग जांच समिति भी बनाई गई है जो प्रस्ताव की पहले जांच करेगी उसके बाद ही मंजूरी दी जाएगी।
गौरव कुमार, नगर आयुक्त