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यूपी: 14 साल बाद दर्ज हुआ सहकारी बैंक में करोड़ों के घोटाले का केस

Tue, 18 Jul 2017 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक में 14 साल पहले भविष्य निधि ट्रस्ट में हुए करोड़ों के घोटाले में अंतत: सोमवार को एफआईआर दर्ज करा दी गई।
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घोटाले की जांच में बैंक के तत्कालीन सचिव मजहर हुसैन दोषी पाए गए थे लेकिन विभागीय मामला होने के चलते अधिकारी फाइल दबाए बैठे थे।

सहकारिता विभाग के आयुक्त एवं निबंधक हरिराज किशोर की फटकार के बाद वर्तमान सचिव राजकुमार यादव ने तत्कालीन सचिव मजहर हुसैन के खिलाफ केस दर्ज कराया। इंस्पेक्टर राजकुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) को ट्रांसफर कर दी गई है।

इंस्पेक्टर ने बताया कि घोटाला वर्ष 2003 में मजहर हुसैन के कार्यकाल में हुआ था। सहकारी बैंक के कर्मचारियों के भविष्य निधि ट्रस्ट की रकम को बैंक विभिन्न कंपनियों में निवेश करता है। इसके लिए बैंक के प्रबंधक, सचिव व अन्य पदाधिकारियों की एक समिति बनी होती है जो निवेश करने वाली कंपनियों के नाम तय करती है।
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12 कंपनियों में किए गए थे निवेश

वर्ष 2003 में बैंक ने भविष्य निधि की रकम के लगभग 17 करोड़ रुपये कुल 12 कंपनियों में निवेश किए थे। बाद में यह रकम वापस नहीं मिली।

तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक प्रेमशंकर ने जांच की तो पता चला कि निवेश में एजेंटों के माध्यम से ब्रोकरेज के रूप में तत्कालीन सचिव सहित अन्य अधिकारियों ने मोटा कमीशन लिया था। उन्होंने असुरक्षित निवेश की सक्षम एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश की थी।

अपनी जांच रिपोर्ट में उन्होंने 12 कंपनियों में से मध्य प्रदेश लघु उद्योग विकास निगम (एमपीएसआईडीसी) की तरफ से ही निवेश के मूलधन के रूप में 68 लाख रुपये, ब्याज के रूप में करीब सवा लाख रुपये वापस न मिलने का जिक्र किया था।
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पांच साल पहले ईओडब्ल्यू से जांच को लिखा था पत्र

उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के कर्मचारी भविष्य निधि ट्रस्ट में हुए घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू से कराने के लिए पांच साल पहले तत्कालीन संयुक्त सचिव वहीद उल्लाह ने निबंधक को पत्र लिखा था। उन्होंने पत्र में वर्तमान प्रबंध निदेशक को भी संलिप्त बताया था। उनके पत्र को भी विभागीय अधिकारी लटकाए रहे।

घोटाले के तीन साल बाद ही रिटायर हो गया था मुख्य आरोपी
घोटाले के तीन साल बाद वर्ष 2010 में ही मुख्य आरोपी तत्कालीन सचिव मजहर हुसैन रिटायर हो गए थे। इंस्पेक्टर का कहना है कि बैंक अधिकारी घोटाले को दबाने में जुटे थे इसलिए वह इतने साल तक मामला लटकाए रहे। अगर पहले कार्रवाई की जाती तो शायद अब तक घोटाले के आरोपी जेल में होते।
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