स्वास्थ्य विभाग में प्रोन्नति के लिए चिकित्सा अधिकारियों ने शासन और गोपन विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर अपनी वार्षिक चरित्र पंजिका (एसीआर) में मनचाहा फेरबदल करा लिया।
मामला खुलने के बाद जब जांच कराई गई तो सिर्फ एक कर्मचारी और एक संयुक्त निदेशक स्तर की महिला अधिकारी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया।
इसके बाद गोपन विभाग के प्रशासनिक अधिकारी को शासन ने बर्खास्त कर दिया है, जबकि संयुक्त निदेशक स्तर की चिकित्सक के खिलाफ अभी जांच ही चल रही है।
स्वास्थ्य विभाग में एसीआर में फेरबदल का मामला सामने से अधिकारियों के होश उड़ गए हैं।
50 से अधिक चिकित्सा अधिकारियों ने अपनी एसीआर सुधारने के लिए हस्ताक्षर बदले और चरित्र पंजिका की फोटो प्रति लगा दी।
एक चिकित्सा अधिकारी की शिकायत के बाद मामला खुला तो पूरे प्रकरण की जांच कराई गई।
इसमें पता चला कि एक चिकित्सा अधिकारी की एसीआर की तीन वर्षों की मूल और फोटो कॉपी भी थी।
सात चिकित्सा अधिकारियों की 14 एसीआर की फोटो कॉपी भी फाइल में मिली। पांच चिकित्सा अधिकारियों के नौ चरित्र पंजिकाओं में हस्ताक्षर भी अलग-अलग पाए गए।
12 चिकित्सा अधिकारियों की एसीआर में ओवरराइटिंग मिली।
इसके बाद गोपन विभाग के प्रशासनिक अधिकारी को इस मामले में प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए सितंबर 2013 में निलंबित कर दिया गया।
अपर निदेशक स्तर की एक अधिकारी ने इस मामले की पूरी जांच की, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी को दोषी पाए जाने के बाद गत 4 जून को बर्खास्त कर दिया गया।
बचाए जा रहे कई उच्चाधिकारी
स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा अधिकारियों ने प्रोन्नति के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय के प्रशासनिक अधिकारी, गोपन विभाग के कर्मचारी, संयुक्त निदेशक, अपर निदेशक, निदेशक, महानिदेशक और शासन स्तर पर समीक्षा अधिकारी, अनुभाग अधिकारी, अनुसचिव सहित अधिकारियों की पूरी फौज है।
नियमानुसार ये सभी पत्रावलियों का अवलोकन करते हैं और उस पर अपनी टिप्पणी भी अंकित करते हैं, जबकि शासन और महानिदेशालय के उच्च अधिकारियों को बचाने के लिए सिर्फ एकप्रशासनिक अधिकारी को बर्खास्त कर पूरे मामले को दबाया जा रहा है।