राजभर ने पूर्वांचल के साथ ही पश्चिम के कई जिलों के निकायों में उम्मीदवार उतारकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सुभासपा का प्रभाव सिर्फ पूर्वांचल में नहीं है बल्कि पश्चिम के भी कई जिलों में उनके पास इतना वोट बैंक है, जिससे किसी भी चुनाव को प्रभावित किया जा सकता है। इसलिए उन्होंने पश्चिम में आगरा मथुरा, गाजियाबाद और मेरठ नगर निगम में महापौर पद भी चुनाव लड़ा रहे हैं।
निगमों के बजाय छोटे निकायों पर फोकस
राजभर जाति का प्रभाव नगर निगमों के बजाय छोटे निकायों में अधिक है। इसलिए सुभासपा अध्यक्ष ने 17 में से सिर्फ 6 नगर निगमों में ही महापौर पद पर उम्मीदवार उतारे हैं। इसमें लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मथुरा, गाजियाबाद और मेरठ शामिल हैं। जबकि नगर पालिका परिषद के 62 और नगर पंचायतों के 102 अध्यक्ष पदों पर प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें पूर्वांचल के सभी 27 जिलों के अलावा पश्चिमांचल के भी कुछ निकाय शामिल हैं। इसके अलावा सभी प्रकार के निकायों में 450 से अधिक पार्षद भी चुनाव मैदान में उतारे हैं।