रोली खन्ना, लखनऊ। भारतीय स्टेट बैंक ने नवनियुक्त महिला कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए एक नई पहल शुरू की है। इसे ‘सखी’ नाम दिया है। यह एक मेंटरशिप प्रोग्राम है, जिसमें एक वरिष्ठ महिला अधिकारी को दो साल तक जूनियर महिला कर्मचारी के साथ लगाया जाता है। वह जूनियर महिला कर्मी की हर छोटी-बड़ी समस्या दूर करने, काम का तनाव कम करने व उसे नए माहौल में ढलने में सहयोग करती है। लखनऊ सर्किल में एसबीआई की सभी 1700 शाखाओं में इस प्रोग्राम को जुलाई 2020 में लागू किया गया है। इसे मॉडल मानते हुए देश भर में बैंक की सभी शाखाओं में सखी मेंटरशिप प्रोग्राम जनवरी 2021 में लागू कर दिया गया है।
शिकायतें नहीं समाधान पर काम करना होगा
भारतीय स्टेट बैंक लखनऊ के सीजीएम अजय खन्ना बताते हैं कि मैंने यहां जून 2020 में कार्यभार ग्रहण किया था। मेरे पास एक महिला कर्मी की शिकायत का मामला आया। पड़ताल में सामने आया कि यह महज नए परिवेश, नए लोगों को न समझ पाने के कारण था। ऐसी शिकायतों का स्थायी हल खोजने के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू किया गया। सखी नाम देने का मकसद था कि एक सहेली से सबकुछ साझा किया जाता है। सखियां तनाव भी आपस में बांट लेती हैं और मुश्किलें भी मिलकर दूर कर लेती हैं। एक जुलाई 2020 को बैंक के स्थापना दिवस पर इस प्रोग्राम की शुरुआत की गई।
बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ाएंगे महिलाओं की भागीदारी
सीजीएम कहते हैं कि पूरे देश में बैंक में महिला कर्मचारियों का अनुपात 25 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 15 फीसदी है। हम चाहते हैं कि सखियों के जरिये यह संदेश जाए कि बैंकिंग कॅरिअर का एक महत्वपूर्ण विकल्प है। खासकर महिलाओं को तो इसे अवश्य चुनना चाहिए। हम प्रदेश की बच्चियों को, महिलाओं को हम यह संदेश भी देना चाहते हैं कि यदि वे बैंकिंग को चुनती हैं तो उन्हें राह दिखाने के लिए एक शख्स होगा। यह मेंटरशिप कार्यक्रम अभिभावकों के दिल में विश्वास जगाएगा कि उनकी बेटियों के लिए बैंक का कॅरिअर बेहतर विकल्प है।
मेंटरशिप प्रोग्राम में इनकी भूमिका सराहनीय
कामिनी गौतम, गिरिजा शुक्ला, रीतू पोरवाल, नमिता अग्रवाल, सुभ्रा पांडेय, सुभांगी किशन, आकांक्षा खंडेलवाल, अर्पिता राय, रिचा चौहान, पंकज रानी, सुनीता देवी, ज्योति विश्वकर्मा, दीप्ति मुखर्जी, गीतिका मौर्या, अंकिता अग्रवाल।