दिनभर चिलचिलाती धूप और उमस लेकिन शाम को बादल बरसे भी और गरजे भी। इस बारिश का लुत्फ नायिकाओं के साथ उनकेपरिजनों ने भी उठाया।
बारिश की फुहारें गीतों के जरिए मंच से हाल में बैठे सभी दर्शकों पर गिर रही थीं, जिससे माहौल सावनमयी हो गया। मौका था राय उमानाथ बली में आयोजित सावन गीतों पर आधारित कार्यक्रम ‘सावन...मनभावन’ कार्यक्रम का। जिसमें लोकगायिकाओं ने सावन गीतों की विभिन्न शैलियों में गीत प्रस्तुत किए।
शुरूआत झूला गीत ‘आई झूलन की बहार, घटा छाई घनघोर...’ से हुई। इसके बाद गायिकाओं ने बरखा गीत ‘घनघोर घटाएं छाई हैं फिर याद किसी की आई है’ सुनाया तो लगा सभागार में बादल गरजने लगे हैं।
फिर पिया से आरजू लगाए बैठी नायिका ने ‘अबकी सावन झूलनी गढ़ाए दे पिया...’ सुनाकर अपनी डिमाण्ड पति केसामने रखी। कजरी ‘अबकी सावन सईयां घर से न निकसो’, ‘कान्हा तोरी’ व ‘हम जइदा नई हरवा’ साहित कई लोकगीत सुनाए।
लोकगायिकाओं कुसुम वर्मा, उन्नति, शिवानी, सुप्रिया, सुषमा, ज्योति, वंदना, नेत्रा, अलका, रूपाली, पूजा, अरुणा, संगीता, नीलिमा, डॉ. आभा, रेनू पाण्डेय, ममता, शारदा, रिचा और सुमन शर्मा ने पारम्परिक गीत सुनाए।
संगीत निर्देशन केवल कुमार का रहा। जबकि तबले पर सत्यम शिवम सुंदरम सिंह, ढोलक पर अरुण त्रिपाठी, ऑर्गन पर चंद्रेश और ऑक्टोपैड पर सुरेंद्र सिंह ने संगत की। मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री अरुण कुमार कोरी थीं। इतिहासकार योगेश प्रवीण, पारुण खत्री सहित कई लोग उपस्थित रहे।